आधी आबादी ने पकड़ी स्वावलंबन की डोर, लिखी सफलता की इबारत

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– स्वरोजगार से सुधरी हालत, परिवार के जीविकोपार्जन में मिल रही मदद

– छोटे-छोटे प्रयासों से ऊंचाईयां छू मिसाल बन गईं विंध्य क्षेत्र की महिलाएं

मीरजापुर, 14 जून (हि.स.)। गांव में रह रही महिलाएं कामयाबी की इबारत लिख रही हैं। छोटे-छोटे प्रयासों से ऊंचाईयां छू रही हैं। महिलाएं अपने घर का खर्च चलाने के साथ अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। विंध्य क्षेत्र की महिलाओं ने अपनी हिम्मत, मेहनत, लगन और जज्बे से न सिर्फ कामयाबी की इबारत लिखी, बल्कि वे औरों के लिए मिसाल बन गई हैं। मुश्किलों के तूफानों से टकराकर इन महिलाओं ने न सिर्फ खुद को बल्कि न जाने कितनी और जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें सशक्त किया। बड़ी बात यह है कि घरों में रहकर ही महिलाओं ने सफलता रचने का काम कर दिखाया है। पेश है ऐसी महिलाओं की कहानी।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म उद्योग से मिली राह, आटा चक्की की संभाली कमान

प्रधानमंत्री सूक्ष्म उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) योजना से छानबे ब्लाक अंतर्गत रामपुर भटेवरा गांव निवासी रेखा सिंह सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। छोटी सी किराना की दुकान से आज आटा चक्की संचालिका बन गई हैं। पहले दो से हजार की आमदनी मुश्किल से होती थी। वर्तमान में लगभग पांच से छह हजार रुपया प्रतिमाह आय हो रही हैं। उनके पति राजा सिंह भी इस कार्य में मदद करके प्रोत्साहित कर रहे हैं। आर्थिक समृद्धि होने से बच्चों की पढ़ाई बेहतर तरीके से करा पा रही हैं। उद्यान विभाग के प्रधानमंत्री सूक्ष्म उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) योजना के खाद्यान्न प्रसंस्करण इकाई से आटा चक्की लगाया। इकाई की स्थापना पर लगभग 1.66 लाख रुपया खर्च आया है, जिसमें से 58 हजार का अनुदान मिला है। इकाई संचालक रेखा सिंह ने बताया कि आटे की पिसाई के लिए प्रति किग्रा 1.50 रुपया शुल्क लिया जाता है। इसके साथ ही गेहूं की खरीद करके आटा की बिक्री करती हैं। क्षेत्र में बिजली आपूर्ति के अनुसार आटा चक्की को चलाती हैं। आटा चक्की लगाकर वे खुद आत्मनिर्भर बनी ही, दो अन्य लोगों को भी रोजगार मिला है। आज परिवार के जीविकोपार्जन में मदद मिल रही है।

खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों से लोग बन रहे आत्मनिर्भर

सिटी ब्लाक के चेरूईराम गांव निवासी धनंजय ने बताया कि 29.19 लाख से टमाटर (अचार-मुरब्बा) इकाई लगाया है और अचार-मुरब्बा, सास, हल्दी आदि बनाकर एवं बेचकर 5-6 लाख रुपये वार्षिक आय हो रही है। छानबे ब्लाक के गैपुरा निवासी राकेश कुमार पांडेय बताया कि 29.20 लाख से आयल सीड बेस्ट प्रोडक्ट इकाई लगाया है। संपूर्ण इकाई की स्थापना के लिए 1.45 करोड़ स्टीमेट है, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अतिरिक्त बैंक से भी लोन लिया है। इंदौर की मशीनों से उत्पादन करके बिक्री की जा रही है। मशीन से प्रतिदिन 15 टन पेराई होता है। इसमें छह टन तेल एवं नौ टन खली निकलता है। वहीं विंध्याचल में 12.25 लाख की लागत से लाचीदाना इकाई स्थापित करने वाले धीरज द्विवेदी ने बताया कि कानपुर से मशीन मंगाया है। प्रतिदिन तीन क्विंटल उत्पादन होता है। दुकानों में 4500 रुपये प्रति क्विंटल बिक्री की जाती है। सिटी ब्लाक के नकहरा में 10 लाख से बेकरी उत्पादन इकाई स्थापित करने वाले राचित कुमार ने बताया कि मशीन फैजाबाद से मंगाया गया है। प्रतिदिन बेकरी प्रोडक्ट का विक्रय करके अच्छा मुनाफा हो रहा है। 10 लोगों को रोजगार मिल रहा है। अभी और क्षमता वृद्धि की जाएगी।

225 ने स्वरोजगार के लिए लिया लोन, मिलेगा 35 प्रतिशत अनुदान

जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया कि उद्यम लगाने के लिए दो लाख से लेकर 15 करोड़ तक का लोन मिल रहा है। इस पर सरकार 35 प्रतिशत अनुदान दे रही है। इसका लाभ उठाने के लिए एफएमई पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में 185 का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष 225 लोगों को स्वरोजगार के लिए लोन दिलाकर कार्य आरंभ कराया जा रहा है।

स्वरोजगार को लगाएं उद्यम

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत केला आधारित उत्पादन, बेकरी, पशु एवं मुर्गी चारा, दाल एवं दाल मिल, चावल मिल, मक्का उत्पाद प्रसंस्करण, दुग्ध, फल, हर्बल, मशरूम, आयल सीड, रेडी टू कुक, सोयाबीन, मसाला एवं मसाला, गन्ना, सब्जी, फ्लोर मिल उद्यम लगा सकते हैं।