08HREG30 मीरजापुर में वर्ष 1978 में पहली बार दिखी थी बाढ़ की विभीषिका, प्रशासन अलर्ट
– 37 बाढ़ चौकियां हर दो घंटे पर बताएंगी जलस्तर
– कलेक्ट्रेट व सिंचाई विभाग में खुला बाढ़ नियंत्रण कक्ष
मीरजापुर, 08 जून (हि.स.)। बाढ़ से निपटने के लिए तैयारी पूर्ण कर ली गई है। नाव की व्यवस्था की जा रही है। अन्य तैयारी भी शुरू कर दी गई है। बाढ़ की स्थिति पर नियंत्रण एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान व सुरक्षा के लिए कुल 37 बाढ़ चौकियां बनाई गई है। इन बाढ़ चौकियों पर लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, चिकित्सा विभाग, पशु चिकित्सा विभाग विद्युत विभाग से समन्वय स्थापित कर कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। साथ ही बाढ़ नियंत्रण कक्ष 15 जून 2023 से कार्य करना प्रारंभ कर देंगे। बाढ़ एवं जलाशयों के जलस्तर की सूचना 15 जून से दो-दो घंटे के अंतराल पर शासन-प्रशासन को उपलब्ध कराई जाएगी।
जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष कलेक्ट्रेट व सिंचाई विभाग में खोला जाएगा। बाढ़ नियंत्रण कक्ष कलेक्ट्रेट का नंबर 05442-256552 व सिचाई विभाग फतहां कालोनी का नंबर 05442-252589 है। इसमें तीन शिफ्ट में अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। बाढ़ से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए पुलिस विभाग की ओर से बाढ़ निंयत्रण कक्षों में वायरलेस सेट लगाया जाएगा।
बाढ़ प्रबंधन व राहत कार्य के लिए फ्लड स्टियरिंग ग्रुप गठित
बाढ़ प्रबंधन व राहत कार्य के लिए जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने फ्लड स्टीयरिंग ग्रुप का गठन किया है। स्टीयरिंग ग्रुप में पुलिस अधीक्षक, जिला बाढ़ राहत अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला आपूर्ति अधिकारी, अधिशासी अभिंयता लोक निर्माण विभाग, अधिशासी अभियंता विद्युत, अधिशासी अभियंता जल निगम को सदस्य, अधिशासी अभियंता एवं समन्वय अधिकारी बाढ़ को सदस्य व सचिव नामित किया गया है।
पिछले वर्ष खतरे का निशान पार गया था गंगा जलस्तर, बाढ़ से प्रभावित हुए थे 310 गांव
वर्ष 2022 में गंगा जलस्तर खतरे के निशान 77.774 को पार गया था और मीरजापुर के 310 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे। करीब पांच करोड़ रुपये की फसल व सब्जी नुकसान हुई थी। बाढ़ की विभीषिका से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को बचाने के लिए प्रशासन व सिंचाई विभाग कमर कस चुकी है। दरअसल, 20 जून से बारिश शुरू होने का अनुमान है। हालांकि प्रति वर्ष अगस्त व सितंबर माह तक मीरजापुर में बाढ़ आती है।
बाढ़ से घिरे गांव के लिए नाव की व्यवस्था
बाढ़ के दौरान जिला पंचायत व सिंचाई विभाग की ओर से जरुरत के अनुसार नाव की व्यवस्था कराई जाती है, ताकि बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके और जो गांव बाढ़ से घिरे होते हैं, उनको रोजमर्रा की वस्तु पहुंचाई जा सके।
पाानी छोड़ने से 24 घंटे पहले मिलेगी सूचना
सिंचाई विभाग अपने सभी बंधों पर निगरानी रखेगा। बांध में क्षमता से अधिक पानी होने पर पानी छोड़ने से 24 घंटे पहले लोगों को सूचना देगा, ताकि किसी प्रकार की कोई घटना न हो।
बाढ़ से निपटने की तैयारी
बाढ़ के समय आवश्यक सामाग्रियों की आपूर्ति के लिए साधन, क्षतिग्रस्त मार्ग मरम्मत, सुरक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर पीएसी, पुलिस च होमगार्ड के पेट्रोलिंग का प्रबंध, शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली का उचित प्रबंध, वर्षा का पानी निकालने की समुचित व्यवस्था, राहत कार्यों से संबंधित अन्य सभी कार्य ससमय पूर्ण कर लिया जाए। ऐसा जिलाधिकारी का निर्देश है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र
अपर जिलाधिकारी वित एवं राजस्व शिव प्रताप शुक्ल ने बताया कि मीरजापुर में कुल 10 नदियां हैं। मुख्य नदी गंगा व शेष नौ छोटी नदियां हैं। जनपद के दो तहसील सदर व चुनार तथा विकास खंड सिटी, कोन, छानबे, मझवां, सीखड़, पहाड़ी, जमालपुर एवं नरायनपुर बाढ़ से प्रभावित होते हैं। गंगा नदी में खतरे का निशान बिंदु 77.724 मीटर है। मीरजापुर में गंगा जलस्तर वर्ष 1978 में 80.340 मीटर, वर्ष 2013 में 79.050 मीटर, वर्ष 2016 में 78.550 मीटर, वर्ष 2019 में 78.980 मीटर, वर्ष 2021 में 78.700 मीटर एवं वर्ष 2022 में 78.110 मीटर रहा है।
जलभराव न हो, एसडीएम व ईओ की जिम्मेदारी
उपजिलाधिकारी सदर व चुनार आवश्यकतानुसार स्थल को चिहिन्त कर जल निकासी की व्यवस्था कराएंगे। साथ ही सभी नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत के ईओ को निर्देशित किया गया है कि अपने-अपने कार्य क्षेत्रों की नालियों आदि की सफाई वर्षा काल से पहले करा दें, ताकि वर्षा काल में पानी सुगमता से निकल जाए और जलभराव की स्थिति न उत्पन्न हो।