श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग सुनकर भावविभोर हुए भक्त

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04HREG344 श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग सुनकर भावविभोर हुए भक्त

लखनऊ, 04 जून (हि.स.)। श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग सुनकर भक्त भावविभोर हो गए। जानकीपुरम वशिष्ठपुरम, शिव शक्ति सेवा संस्थान के प्रतिष्ठित मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी प्रदीप बाजपेयी जी महाराज ने रास पंचम अध्याय का वर्णन किया।

उन्होंने कथा को विस्तार देते हुए बताया कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है।

कथा में उन्होंने भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ करते हुए कथा पंडाल में आचार्य जी ने समा बांधा दिया।

कथा के पंडाल में समिति के सभी पदाधिकारीगण रघुवंश ठाकुर,अशोक कुमार विश्वकर्मा, प्रमोद मिश्रा, वीर बहादुर उपाध्याय, हरीश दीक्षित, अरुण कुमार शुक्ला, विनोद शुक्ला, अनिल कुमार शर्मा, सर्वेश सक्सेना और मुख्य यजमान रामकर पाण्डेय ने पूरे मनोयोग एवं समर्पित सेवा भाव से कथा का श्रवणपान किया।