नैनो मैटिरियल कोटिंग के नवाचार के लिए आईआईटी बीएचयू को 20 साल का पेटेंट

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13HREG422 नैनो मैटिरियल कोटिंग के नवाचार के लिए आईआईटी बीएचयू को 20 साल का पेटेंट

-टेढ़े मेढ़े दांतों के इलाज के लिए काफी महत्वपूर्ण है यह शोध

वाराणसी, 13 जून (हि.स.)। आर्थोडॉन्टिक वायर पर नैनो मैटिरियल कोटिंग के नवाचार के लिए बीएचयू व आईआईटी बीएचयू को भारत सरकार ने 20 साल का पेटेंट दिया है। बीएचयू दंत चिकित्सा संकाय में कार्यरत ऑर्थोडॉन्टिक चिकित्सक प्रो. टी.पी. चतुर्वेदी और मैटेरियल विभाग आईआईटी (बीएचयू) के डॉ चंदन उपाध्याय ने ऑर्थोडॉन्टिक तार मैटेरियल में नैनो मैटेरियल की कोटिंग नए ढंग से की है। इस नवाचार की विशेषता यह है कि इससे घर्षण बल कम लगता है और आसानी से दांत को बिना दर्द या कम दर्द से अंदर किया जा सकता है। इसके लिए टाइटेनियम ऑक्साइड के नैनो मैटेरियल की कोटिंग की गई जो मुंह के अंदर हर पैमाने पर सुरक्षित पाई गई। इस अविष्कार को भारत सरकार के पेटेंट ऑफिस ने सफल अविष्कार माना है और 20 साल का पेटेंट किया है। इस महत्वपूर्ण आविष्कार के लिए प्रोफेसर चर्तुवेदी ने आईआईटी बीएचयू का आभार जताया है।

प्रो. चर्तुवेदी के अनुसार ऑर्थोडॉन्टिक ब्रेसेस को दांत पर चिपकाने के बाद उपलब्ध ऑर्थोडॉन्टिक तार को ब्रेसेस में बांध कर दांत को अंदर या टेढे मेढे अनियमित दांत, को ठीक किया जाता है। यह प्रक्रिया सामान्तया काफी तनावपूर्ण होती है, जिसका विशेष कारण दांतों पर प्रयुक्त बल का घर्षण की वजह से क्षरण है। इस लिए ऑर्थोडॉन्टिक तार मैटेरियल में नैनो मैटेरियल की कोटिंग नए ढंग से की गई। इस इलाज के लिए 07 साल की उम्र से लेकर 20 साल की उम्र सबसे अच्छी मानी जाती है। इसमें 06 महीने से 06 माह का समय लग सकता है।

गौरतलब हो कि ऑर्थोडॉन्टिक्स शाखा डेंटिस्ट्री की सुपरस्पेशलिटी है, जिसमे टेढे मेढे अनियमित दांत, जबड़े और चेहरे को ठीक किया जाता है। ऑर्थोडॉन्टिक दिक्कत से, दांतों के स्वास्थ्य, चेहरे की सुंदरता व मुस्कराहट पर खराब प्रभाव पड़ता है। इसके लिए दांत पर विशेष अप्लायंस या ब्रेसेस लगाकर इलाज किया जाता है।