लुभावने वादों के बीच दो दशकों से नहीं सुलझ सकी हैं समस्याएं

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बिजनौर,18 अप्रैल ( हि. सं.)। 4 मई को नगर पालिका परिषद के चुनाव होने जा रहे हैं । मुस्लिम बाहुल्य इस सीट पर नगरपालिका स्योहारा के अंतर्गत लगभग 39000 मतदाता अपने मतों का प्रयोग करेंगे। चुनाव मैदान में जो प्रत्याशी अभी तक जनता के बीच आए हैं, उनमें 2 प्रत्याशी ऐसे हैं जो तीन-तीन, चार-चार बार नगर पालिका की बागडोर संभाल चुके हैं। इतना ही नहीं, इन प्रत्याशियों द्वारा प्रत्येक चुनाव से पूर्व जनता को झूठे वादे और आश्वासन दिए जाते रहे हैं, परंतु चुनाव जीतने के बाद इन आश्वासनों में से कोई भी आश्वासन पूरा नहीं हो पाता और भोली-भाली जनता हर बार चुनाव के बाद खुद को ठगा महसूस करती है। यहां मुख्य चुनाव चौधरीयान और मिल्लियान मोहल्ला के बीच सिमट कर रह जाता है ।

मोहल्ला चौधरीयान से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक हाजी नईमूल हसन के चाचा हाजी मसूद उल हसन कई बार नगर पालिका परिषद के चैयरमैन रह चुके हैं। हाजी नईम उल हसन की पत्नी तरन्नुम मालिक भी चेयरमैन रह चुकी हैं। इस बार भी नईमुल हसन की पत्नी तरनुम मालिक को समाजवादी पार्टी से उतारा है। दूसरी ओर निवर्तमान अध्यक्ष जलील एक बार फिर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। अख्तर जलील के मोहल्ले के ही युवा समाजसेवी डॉक्टर दानिश कमाल को कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं आप पार्टी से कद्दावर नेता फैसल वारसी चुनाव मैदान में हैं ।

सबसे ज्यादा तैयारी में भाजपा के लोग हैं। भारतीय जनता पार्टी के द्वारा डॉक्टर विनीत देवरा को टिकट दिया गया है। विनीत देवरा के पिता स्वर्गीय डॉ. नेमीशरण वर्मा एक पुराने पदाधिकारी और संघी रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी से कद्दावर नेता हाजी इलियास के पुत्र आमिर चौधरी चुनाव मैदान में हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों में शोएब अंसारी भी ताल ठोक रहे हैं।

कुल मिलाकर स्योहारा नगर पालिका का चुनाव बहुत पेचीदा है। नगर में रोडवेज का अड्डा न होना, महिला महाविद्यालय की स्थापना न होना,नूरपुर रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज की स्थापना न होना, नगर के कूड़े का निस्तारण का समाधान के लिए अभी तक कोई ठोस व्यवस्था न होना, नगरपालिका का बारात घर अधूरा पड़ा रहना, नगर में जलकल व्यवस्था में बोरिंग की कमी , नगर में पार्क न होना आदि प्रमुख समस्याएं कई दशकों से ज्यों की त्यों बनी हुई है ।

जनता हर बार झूठे वादों में फंस जाती है । नेता चुनाव जीतकर 5 साल तक मजे लेते हैं और जनता उनके आगे-पीछे घूमती रहती है ।क्या इस बार भी जनता ठगी जाएगी या सोच समझकर अपने मत का प्रयोग करेगी, यह समय ही बताएगा।