07HNAT48 मुरैना की गजक और रीवा के सुंदरजा आम को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय पहचानः शिवराज
भोपाल, 07 अप्रैल (हि.स.)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुरैना की गजक और रीवा के सुंदरजा आम को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। मुरैना की गजक का स्वाद, देश ही नहीं दुनिया में सराहा जा रहा है। रीवा के सुंदरजा आम की मिठास अद्भुत है। प्रदेश का चंबल और विंध्य क्षेत्र निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर हैं।
मुख्यमंत्री चौहान ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मुरैना की गजक और रीवा के सुंदरजा आम को जीआई टैग मिलने से इन क्षेत्रों की राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान बनेगी। उन्होंने विंध्य और चंबलवासियों को बधाई दी।
दरअसल, केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के इंडस्ट्री प्रमोशन एडं इंटरनल ट्रेड द्वारा मध्य प्रदेश के छह उत्पादों को जीआई टैग प्रदान किया गया है। इनमें रीवा का सुंदरजा आम और मुरैना की गजक भी शामिल है। इसके अलावा डिंडौरी की गोंड पेंटिंग, ग्वालियर का कार्पेट, उज्जैन की बाटिक प्रिंट, जबलपुर भेड़ाघाट का स्टोन क्राफ्ट, बालाघाट की वारासिओनी की साड़ी को भी जीआई टैग प्रदान किया गया है। यह पहला अवसर है कि जब एक साथ प्रदेश के इतने उत्पादों को जीआई टैग दिया गया है। इसके साथ ही प्रदेश में जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संख्या 19 हो गई है।
उल्लेखनीय है कि सुंदरजा आम मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गोविंदगढ़ कस्बे में बहुतायत में होता है। फलों के राजा आम की यह एक विशेष प्रजाति है। सुंदरजा सिर्फ भारत के लोगों की ही पसंद नहीं है बल्कि विदेशी भी इसके दीवाने हैं। रीवा जिले के गोविंदगढ़ के बगीचों से निकलकर ये आम विदेशी जमीं पर अपनी महक बिखेर रहा है। इस आम की विशेष किस्म की सुगंध और मिठास का कोई तोड़ नहीं है। सुंदरजा की खासियत यह है कि यह बिना रेशे वाला होता है और इसमें पाई जाने वाली शर्करा का प्रकार कुछ ऐसा है कि इसे शुगर के मरीज भी खा सकते हैं।
विंध्य क्षेत्र की शान समझे जाने वाले सुंदरजा आम का उत्पादन पहले रीवा जिले के गोविंदगढ़ किले के बगीचों में होता था लेकिन कालांतर में गोविंदगढ़ इलाके के साथ ही रीवा शहर से लगे कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में भी बहुतायत मात्रा में इसकी खेती की जाती है। हालांकि गोविंदगढ़ के बागों में होने वाला सुंदरजा आम हल्का सफेद रंग लिए होता है जबकि रीवा के कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में उत्पादित होने वाला सुंदरजा आम हल्का हरा होता है।
गोविंदगढ़ किले में होने वाला सुंदरजा आम रियासत काल में राजे-राजवाड़ों की पसंद था, लेकिन आज दिल्ली, मुंबई, छत्तीसगढ़, गुजरात सहित कई राज्यों से लोग इसे एडवांस आर्डर देकर मंगवाते हैं। इतना ही नहीं विदेशों में भी सुंदरजा आम को खूब पसंद किया जाता है, खासतौर से फ्रांस, इंग्लैंड अमेरिका, अरब देशों में सुंदरजा आम के तमाम लोग शौकीन हैं। सुंदरजा आम की लोकप्रियता का अंदाजा आप इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 1968 में इस आम के नाम पर डाक टिकट जारी किया गया था।
वहीं, मुरैना की गजक की बात करें तो यह एक प्रकार की मिठाई है। अगर गजक के साथ मुरैना का नाम जुड़ जाए तो लोग इसे क्वॉलिटी और स्वाद के लिए सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। इसीलिए मुरैना की गजक का स्वाद पूरे देश में प्रसिद्ध है। गजक बनाने का काम मुरैना का मुख्य उद्योग है। इस गजक की कई खासियत भी है। इस छोटे जिले में लगभग गजक की एक हजार से अधिक दुकानें हैं। अगर गुड़ और तिल से बनी मिठाइयों की बात आए तो गजक को श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसे तो इस गजक का इस्तेमाल लोग पूरे साल करते हैं, लेकिन सर्दियों में इसे खाना गुणकारी माना जाता है।
क्या होता है जीआई टैग
किसी भी रीजन का जो क्षेत्रीय उत्पाद होता है, उससे उस क्षेत्र की पहचान होती है। उस उत्पाद की ख्याति जब देश-दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया होती है, जिसे जीआई टैग यानी जियोग्राफिकल इंडीकेटर कहते हैं। हिंदी में इसे भौगोलिक संकेतक नाम से जाना जाता है।
किसी भी क्षेत्र की विशेष वस्तु जो उस क्षेत्र के अलावा कहीं और नहीं पाई जाए, उसे विशेष पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग दिया जाता है। जीआई टैग उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी किया जाता है, जो वाणिज्य मंत्रालय के तहत संचालित होता है।