06HLEG22 हाईकोर्ट के सात जजों की बेंच ने वकीलों के हड़ताल को गंभीरता से लिया
–कानपुर बार एसोसिएशन के हड़ताली पदाधिकारियों को नोटिस भेज किया तलब
–बार काउंसिल अध्यक्ष से भी मौजूद रहने का अनुरोध
प्रयागराज, 06 अप्रैल (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के वकीलों को तत्काल हड़ताल समाप्त कर काम पर वापस लौटने का निर्देश दिया है और कहा है कि कोई भी वकील या बार एसोसिएशन का पदाधिकारी न्यायिक कार्य निष्पादन में अवरोध उत्पन्न करेगा तो उसे गम्भीरता से लिया जायेगा।
कोर्ट ने कानपुर बार एसोसिएशन अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी व महासचिव अनुराग श्रीवास्तव एवं लायर्स एसोसिएशन कानपुर नगर के अध्यक्ष रवींद्र शर्मा व महासचिव शरद कुमार शुक्ल को नोटिस जारी कर 7 अप्रैल शुक्रवार को सुबह 10 बजे हाईकोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कानपुर के पुलिस कमिश्नर को नोटिस तामील कर इनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही जिलाधिकारी व पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि बार की नोटिस बोर्ड व अदालत परिसर में नोटिस चस्पा कर आज गुरुवार को बजे तक रिपोर्ट भेजें। कोर्ट ने उप्र बार काउंसिल के अध्यक्ष से भी 07 अप्रैल को 10 बजे कोर्ट में मौजूद रहने का अनुरोध किया है।
यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर, न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी, न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र, न्यायमूर्ति डॉ कौशल जयेंद्र ठाकर तथा न्यायमूर्ति एम सी त्रिपाठी की बात जजों की वृहद पीठ ने दिया है।
मालूम हो कि कानपुर के वकीलों ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट का बहिष्कार शुरू किया था। जो बाद में हड़ताल में तब्दील हो गया। वहां के वकील 25 मार्च से हड़ताल पर हैं। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व प्रशासनिक न्यायाधीश ने प्रशासनिक स्तर पर बार एसोसिएशन से बात कर हल निकालने की कोशिश की। पदाधिकारियों ने आश्वासन भी दिया किंतु हड़ताल जारी रखी। वायदे पर अमल नहीं किया और हड़ताल को पूरे जिले में फैलाने की धमकी दे रहे हैं।
इस पर सात जजों की बृहद पीठ ने मामले की सुनवाई की। महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व कैप्टन हरीश उप्पल व अन्य केसों के हवाले से कहा कि वकीलों की हड़ताल का समर्थन नहीं किया जा सकता। माना जाता है वकील काम करेंगे। सरकार वकीलों व जजों को न्याय देने में हर संभव सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि वकीलों की हड़ताल न केवल अवैध व गैर सैद्धांतिक है अपितु न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान है। यह कृत्य व्यावसायिक कदाचार है। वकील हड़ताल कर कोर्ट के कीमती समय को बर्बाद करते है। इससे संस्था की छवि धूमिल होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वकीलों की हड़ताल या बायकाट, खासकर वादकारियों सहित न्याय व्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुंचाती है। कोर्ट ने कहा हड़ताल समाप्त करने के गंभीर प्रयासों के बावजूद वकील हड़ताल पर आमादा है। इनका यह कार्य न्याय देने में बाधक है। यह कोर्ट की अवमानना के शिवाय कुछ नहीं है। जिस पर कोर्ट ने कानपुर के दोनों बार एसोसिएशनों के अध्यक्ष व महासचिवों को नोटिस जारी कर तलब किया है।