विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने का काम करता है अनुवाद : राजेन्द्र कुमार

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29HREG330 विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने का काम करता है अनुवाद : राजेन्द्र कुमार

–पहली बार बांग्ला भाषा की पुस्तकों का हो रहा हिन्दी में अनुवाद : पंकज

–तीन दिवसीय अनुवाद कार्यशाला का उद्घाटन

प्रयागराज, 29 जनवरी (हि.स.)। अनुवाद हमें विश्व नागरिकता की सम्भावना तलाशने का अवसर देता है। यह वह कला है जो कई भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों को आपस में जोड़ने का काम करती है। शब्द और उससे जुड़ी हुई संस्कृति जब एक भाषा से दूसरी भाषा में पहुंचते हैं तब ढेर सारे ऐतिहासिक और समकालीन हमारे सामने होते हैं।

यह बातें प्रख्यात आलोचक प्रो. राजेन्द्र कुमार ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, नई दिल्ली तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान व राजभाषा अनुभाग द्वारा आयोजित अनुवाद कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए कही। इविवि में रविवार को आयोजित तीन दिवसीय इस कार्यशाला में अंग्रेजी व बांग्ला भाषा की बीस पुस्तकों का हिन्दी में अनुवाद किया जाना है।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, नई दिल्ली के सम्पादक पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि भाषाएं हम सभी को जोड़ती हैं और अनुवाद इस जोड़ने की प्रक्रिया का खूबसूरत पुल होता है। हम सभी के लिए यह चुनौती है कि हम पीछे आ रही पीढ़ियों को शब्दों और उनसे जुड़ी संस्कृतियों से परिचित कराएं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पुस्तक न्यास अपनी पुस्तकों के माध्यम से अकेले पिछले वर्ष ही दस करोड़ बच्चों तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर है जब किसी हिन्दी भाषी क्षेत्र में बांग्ला भाषा की पुस्तकों का हिन्दी में अनुवाद हो रहा है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार व राजभाषा अनुभाग के अध्यक्ष प्रो. एन.के शुक्ला ने बताया कि शीघ्र ही विश्वविद्यालय में राजभाषा प्रकोष्ठ स्वतन्त्र रूप से कार्य करने लगेगा जिससे शिक्षकों व छात्रों को लाभ होगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में आयोजित इसी तरह की पिछली कार्यशाला में जिन 25 पुस्तकों का अनुवाद हुआ था उसकी सराहना राजभाषा संसदीय समिति ने भी की थी। विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित वरिष्ठ अनुवादक क्रान्ति शुक्ला ने कहा कि दुनिया की विभिन्न भाषाओं में लिखी गयी दुर्लभ बातें बिना अनुवाद के हम तक पहुंच नहीं सकतीं। बच्चों के साहित्य के अनुवाद का कार्य बहुत महत्वपूर्ण होता है और यह बहुत जरूरी भी है।

प्रारम्भ में कार्यशाला के संयोजक प्रो. संतोष भदौरिया ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि तीन दिनों में अंग्रेजी और बांग्ला भाषा की बीस पुस्तकों का अनुवाद और उनका सम्पादन किया जाना है। पूर्व की भांति ही ये पुस्तकें भी राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित कर दी जायेंगी। उन्होंने कहा कि यह जानना सुखद है कि पिछली कार्यशाला के दौरान तैयार की गयी पुस्तकों की एक लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। कार्यशाला का संचालन डॉ धनंजय चोपड़ा तथा आभार ज्ञापन हरिओम कुमार ने किया।

इविवि की मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी डॉ जया कपूर ने बताया कि कार्यशाला में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पन्द्रह अध्यापक व शोधार्थी भाग ले रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से डॉ जनार्दन, डॉ दीनानाथ मौर्य, डॉ शैलेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ अंगीरा सेन शर्मा, प्रवीण शेखर, डॉ मृत्युंजय राव, डॉ धीरेन्द्र प्रताप सिंह, सचिन मेहरोत्रा, पापिया हालदार, मन्दिरा बोस, प्रतिभा सिंह, प्रियंका शुक्ला, अभिनव चटर्जी शामिल हैं। कार्यशाला में सहयोग के रूप में मूलचन्द्र कुशवाहा, इन्द्रजीत पाल, अरविन्द कुमार तथा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, नई दिल्ली से विजय कुमार व प्रवीण कुमार शामिल हैं।