बच्चों को बाल साहित्य की पुस्तकों से भी जोड़ना होगा : डॉ. भवगवती प्रसाद द्विवेदी

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25HREG401 बच्चों को बाल साहित्य की पुस्तकों से भी जोड़ना होगा : डॉ. भवगवती प्रसाद द्विवेदी

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की ओर से वितरित किए गए बाल साहित्य पुरस्कार

लखनऊ, 25 नवम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की ओर से शुकवार को अभिनन्दन पर्व बाल एवं साहित्य संगोष्ठी का आयोजन हुआ। बाल साहित्यकारों को पुरस्कार भी दिया गया। संस्थान के यशपाल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कार वितरण समारोह में अतिथि डॉ. भवगवती प्रसाद द्विवेदी, साहित्यकार संजीव जायसवाल ‘संजय‘ उपस्थित थे।

इस अवसर पर संजीव जायसवाल ‘संजय‘ ने कहा कि बाल साहित्य लेखन अत्यन्त दायित्वपूर्ण कार्य है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए रचनाओं को कभी-कभी सम्पादकों की अस्वीकृति भी प्राप्त होती है, इस स्थिति से घबराना नहीं चाहिए वरन् अपने लेखन में सुधार करना चाहिए।

डॉ. भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा-बाल साहित्य की गौरवशाली परम्परा में नये-नये नाम जुड़ते जा रहें। बौद्धिकता की आड़ में बच्चों को मात्र शिक्षा से ही जोड़ा जा रहा। उन्हें बाल साहित्य की पुस्तकों से भी जोड़ना होगा।

उन्होंने कहा कि कोई भी रचनाकार पुरस्कार के लिए नहीं लिखता वह अन्तः प्रेरणा से साहित्य सृजन करता है। बाल साहित्य अपेक्षाकृत कम चर्चित रहा है, परन्तु वह बहुत अधिक महत्वपूर्ण है। बाल साहित्य विविध विधाओं में लिखा जा रहा है। बच्चों के लिए रचना करना अत्यन्त कठिन है। प्रेरक बाल साहित्य द्वारा बच्चों को संस्कारित करना हमारी परम्परा रही है। दादी-नानी की कहानियों की क्रम कुछ टूटा है, जिससे बच्चों में संस्कार दिये जाने का महत्वपूर्ण कार्य कुछ बाधित हुआ है। यदि उत्कृष्ट बाल साहित्य किशोर मन तक पहुंचेंगे तो उनका मन उल्लासित हो सकता है। बाल साहित्य भाषा की अतुलनीय सम्पदा है।

इन्हें मिला सम्मान

इस मौके पर नौ बाल साहित्यकारों को विमला रस्तोगी को सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य सम्मान, सोहन लाल द्विवेदी बाल कविता सम्मान से डॉ. अजय प्रसून को, अमृत लाल नागर बाल कथा सम्मान से, ममता नौगरैया को, शिक्षार्थी बाल चित्राकला सम्मान से शिवाशीष शर्मा को, लल्ली प्रसाद पाण्डेय बाल साहित्य पत्रकारिता सम्मान से संजय वर्मा, डॉ. रामकुमार वर्मा बाल नाटक सम्मान से डॉ. भारतेन्दु मिश्र, कृष्ण विनायक फड़के बाल साहित्य समीक्षा सम्मान से अंजीव अंजुम, जगपति चतुर्वेदी बाल विज्ञान लेखन सम्मान से डॉ. धीरेन्द्र बहादुर सिंह, उमाकान्त मालवीय युवा बाल साहित्य सम्मान से ललित मोहन राठौर ‘ललित शौर्य‘ को सम्मानित करते हुए प्रत्येक को रुपये इक्यावन हजार की धनराशि, उत्तरीय एवं प्रशस्ति पत्र दिया गया।

उ.प्र हिन्दी संस्थान की प्रधान सम्पादक, डॉ. अमिता दुब ने कहा कि उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की ओर से बाल साहित्य संवर्द्धन योजना के अन्तर्गत अभिनन्दन पर्व पुरस्कार वितरण समारोह किया गया। बाल साहित्य के सृजन में जितनी महत्वपूर्ण भूमिका रचनाकारों की है, उससे अधिक दायित्व बाल पत्रिकाओं के सम्पादक का भी है। संस्थान द्वारा प्रकाशित बालवाणी द्वैमासिक पत्रिका के माध्यम से हम बाल पाठकों के बीच जाते हैं और उसे सभी का स्नेह और सहयोग मिलता है। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी योगेन्द्र प्रताप सिंह भी मंच पर उपस्थित रहे।