मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ ने किया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग डिस्टेंस पॉइंट का लोकार्पण

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20HREG252 मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ ने किया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग डिस्टेंस पॉइंट का लोकार्पण

– सुप्रीम कोर्ट के ई -कोर्ट्स प्रोजेक्ट अंतर्गत मप्र के पहले सेंटर का हुआ लोकार्पण

– चिकित्सकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साक्ष्य अंकित कराए जाने की मिलेगी सुविधा

– साक्ष्य के संबंध में विभिन्न जिलों तक की यात्रा करने में लगने वाला समय, शक्ति व श्रम बचेगा

इंदौर, 20 नवंबर (हि.स.)। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर, महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग इंदौर के सहयोग से भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरंभ किए गए ई -कोर्ट्स प्रोजेक्ट अंतर्गत मध्य प्रदेश के चिकित्सकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साक्ष्य अंकित कराए जाने हेतु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग डिस्टेंस पॉइंट का लोकार्पण रविवार को मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति रवि मलिमठ ने किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधिपति शील नागू, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के प्रशासनिक न्यायाधिपति विवेक रूसिया, इंदौर बेंच के न्यायाधिपतिगण, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुबोध जैन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित एवं विभागाध्यक्ष फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग इन्दौर डॉ. पीएस ठाकुर भी मौजूद थे।

इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुबोध जैन ने मुख्य न्यायाधिपति एवं उपस्थित न्यायाधिपतिगणों का आभार ज्ञापित किया गया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इस पहल से प्रदेश के चिकित्सकों को विभिन्न जिलों तक की यात्रा करने में लगने वाला समय, शक्ति व श्रम बचेगा। इससे वे अपने समय का उपयोग मरीजों के उपचार के प्राथमिक कर्तव्य में कर सकेंगे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग डिस्टेंस पॉइंट के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए जिला न्यायाधीश एवं जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर के कंप्यूटर अनुभाग के प्रभारी गंगाचरण दुबे ने जानकारी दी कि मुख्य न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की पहल पर ई-कोर्ट परियोजना के अंतर्गत जेलों, पुलिस स्टेशनों के इन्टिग्रेशन के बाद समस्त चिकित्सालयों को न्यायालयों से संबंधित किये जाने का कार्य प्रगति पर है। इसी अनुक्रम में मध्यप्रदेश राज्य में पहली बार वीसी डिस्टेंस प्वाइंट को मान्यता प्रदान कर मुख्य न्यायाधिपति द्वारा लोकार्पित किया गया है।

इससे ऐसे मेडिको लीगल केसेस जिनमें मरीज़ों का चिकित्सीय परीक्षण इन्दौर के चिकित्सालयों में हुआ या मृत्यु उपरांत शव परीक्षण प्रतिवेदन इन्दौर चिकित्सालय में किसी चिकित्सक द्वारा निर्मित किया गया है तथा तद्संबंध में डॉक्टर की चिकित्सीय साक्ष्य की आवश्यकता हो तो राज्य के किसी भी न्यायालय में चल रहे आपराधिक प्रकरण में संबंधित चिकित्सक को साक्ष्य देने के लिए न्यायालय तक यात्रा पर नहीं जाना होगा। अपितु उद्घाटित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पॉइंट से ही वे अपनी न्यायालयीन साक्ष्य अंकित करा सकेंगे। इस सुविधा से चिकित्सकों की साक्ष्य अभाव से लंबित प्रकरण का विलम्ब समाप्त होकर शीघ्र विचारण सुनिश्चित होगा। चिकित्सकों, मरीजों तथा समाज को लाभ मिलेगा।