गोपेश्वर, 08 जुलाई (हि.स.)। नवम्बर 2021 के बाद से जोशीमठ क्षेत्र के तमाम भवनों के साथ ही भूमि, सड़क में भू-धसाव सतत जारी है। इससे जोशीमठ के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। इसको देखते हुए सरकार को इसके बचाव के लिए व्यापक सर्वेक्षण किये जाने की आवश्यकता है। यह बातें जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती और प्रवक्ता कमल रतूड़ी ने कही।
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती और प्रवक्ता कमल रतूड़ी ने शुक्रवार को जोशीमठ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि एक लंबे समय से जोशीमठ में भू-धसाव जारी है। इसके कारण यहां पर अधिकांश भवनों में दरारें आ गई हैं। यही नहीं जोशीमठ को जोड़ने वाली कई सड़कों में भी इस भू-धसाव के चलते दरार आ रही हैं। इसको लेकर कई बार सरकार और प्रशासन से जोशीमठ का व्यापक सर्वेक्षण किये जाने की मांग की जा रही है लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कि जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के अनुरोध पर एक टीम ने जोशीमठ का सर्वे किया था जिसमें डॉ. रवि चोपड़ा, डॉ. नवीन जुयाल, डॉ. एसपी सती शामिल थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सात फरवरी 2021 में रैणी में आयी आपदा इसका एक बड़ा कारण है। एनटीपीसी की टनल, अनियोजित विकास कार्य भी जोशीमठ में हो रहे भू-धसाव के लिए जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा कि इस भू-धसाव के कारण छावनी बाजार स्थित 25 से 30 भवन पूरी तरह से खतरे की जद में आ गये हैं। यहां पर भवन रहने लायक नहीं हैं। ऐसे में इन लोगों के विस्थापन की व्यवस्था किये जाने की बात भी प्रशासन से की गई, मगर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो पायी। प्रतीत हो रहा है कि सरकार और प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी होने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को एक ज्ञापन तथा सर्वे रिपोर्ट सरकार को भेजी है जिसमें जोशीमठ को बचाने के लिए व्यापक सर्वे करने की मांग की गई है।