हरदा: जर्दा-गुटखा पाउच ने छीन लिया पान का कारोबार

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हरदा, 20 मई (हि.स.)। पान खाने के शौकीन अब गुटखा चबा रहें हैं। बढ़ती महंगाई का असर पान के कारोबार पर भी दिख रहा है। इन दिनों जर्दा-गुटखा के चबाने वालों की संख्या ज्यादा देखने को मिल रही है। शहर के गिने चुने पान के ठेलेवाले ही पान से अच्छा कमाई कर रहें है, जहां पान 10 से 20 रुपए में बिक रहा है। वहीं छोटे ठेलेवालों के ठेले में पान सेंटर लिखा हुआ बस देखने को मिल रहा है, जबकि ठेले में पान नहीं मिल रहा है। कोरोना काल में जहां पान के शौकीन लोगों का मुंह लाल ना हो पा रहा था, जबकि गुटखा पर्याप्त मिलता रहा। जिससे पान खाने वाले भी गुटखा लत लगा लिए हैं।

लोगों को बुरी चीजों की आदत जल्दी लग रही है, जबकि पान एक प्राकृतिक औषधि है जो भोजन के लिए सुपाच्य है। लोग पान की महत्व को भूलकर, गलत चीजों की लत लगा बैठे हैं। वहीं आजकल बच्चों को सोशल मीडिया के माध्यम से बुरी लत लग रही है। इन दिनों फेमस एक्टर गुटखा मसाला का विज्ञापन की बुरी चीजों को खाने के लिए प्रोत्साहित कर रहें है। एक दौर था खई के पान बनारस वाला गाना खूब चलाए.. साथ ही पान का कारोबार चरम पर रहा। जबकि वर्तमान में पान बेचने वाले ठेले भी ठेला बंद कर अन्य कामों में लग गए है या ठेले में पान के जगह गुटखा बेचने लगे हैं।

बाजार में पान पती के विक्रेता उमेश पाटील सिराली ने बताया की वे पिछले 30 सालों से यह धंधा कर रहे है, किंतु वर्तमान में गुटखा की मांग बढ़ने के साथ ही पान की मांग घट गई है। धंधा पहले के मुकाबले महज 20 प्रतिशत ही शेष रह गया है। उन्होंने बताया की उम्र बढ़ जाने के कारण वह इस धंधा को छोड़ अन्य काम करने में असमर्थ है। वर्तमान में पान से होने वाली कमाई से केवल रोजी-रोटी ही निकल पा रही है।

प्रदीप प्रजापत ने बताया की पहले उनके ठेले में भी पान बनाते थे, दुकान से प्रतिदिन 30 से 40 पान को बिक्री होती थी, किंतु धीरे-धीरे पान की मांग में कमी आने लगी, जिससे खरीदा हुआ पान पत्ती व गुलकंद ग्राहक ना आने से खराब हो जा रहे थे। जिससे कमाई के जगह घाटा हो रहा था। इस कारण से ठेले में गुटका, पान मसाला व अन्य सामान बेचने को मजबूर है।

जिले में बिकने वाला पान पत्ती में आंध्रप्रदेश का मीठा पान 200 रुपये, कपूरी 100 रुपए, मीठा पत्ता 200 से 500 रुपए, कलकत्ता पान 100 रुपए बगला पान, आंध्रप्रदेश का मीठा पान कोलकाता से मंगाया जाता है।