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–‘भारतीय संस्कृति‘ विषय पर आयोजित संगोष्ठी

प्रयागराज, 09 मई (हि.स.)। शिक्षा एवं समय-समय पर होने वाली बौद्धिक संगोष्ठियां हमारी संस्कृति की रक्षक हैं। इन्ही के द्वारा प्राचीन काल से होती हुई भारतीय संस्कृति हम तक पहुंची है। इस प्रकार ये शैक्षिक संगोष्ठियां भारतीय संस्कृति के प्रचार एवं प्रसार में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उक्त विचार बतौर मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय, मध्यकालीन इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संजय श्रीवास्तव ने सोमवार को आर्य कन्या डिग्री कॉलेज में मध्यकालीन इतिहास विभाग की ओर से ‘भारतीय संस्कृति‘ विषय पर संगोष्ठी में व्यक्त किया।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने भारतीय संस्कृति को विभिन्न भाषाओं, रीति-रिवाजों, परम्पराओं, सहिष्णुता एवं उदारता आदि का सम्मिश्रण बताते हुए विद्यालयों को संस्कृति का केन्द्र बताया। प्राचार्या प्रो. अर्चना पाठक ने भारतीय संस्कृति में आश्रम व्यवस्था एवं वर्ण व्यवस्था की प्रासंगिकता की व्याख्या की। कॉलेज की निदेशक डॉ रमा सिंह ने भारतीय संस्कृति की एक प्रमुख विशेषता आध्यात्मिकता पर प्रकाश डालते हुए धर्म के मूल अर्थ को बताया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के मध्यकालीन इतिहास विभाग की छात्राओं अनुष्का पंडित, युक्ता पाण्डेय, जूही पाण्डेय, खुशी यादव, जूही, श्रद्धा केसरवानी आदि ने भी भारतीय संस्कृति के विविध पहलुओं पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान अन्तर महाविद्यालयी निबन्ध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया। जिसमें प्रथम स्थान अंशिका सिंह, द्वितीय स्थान शिवम शुक्ला एवं दीपिका द्विवेदी, ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज, तृतीय स्थान आर्य कन्या की जूही ने प्राप्त किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ नाज़नीन फारुकी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ अर्चना सिंह ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय की डॉ ममता गुप्ता, डॉ कल्पना वर्मा, डॉ मधुरिमा, डॉ अंजु, डॉ ज्योतिरानी, डॉ दीपशिखा, डॉ अनुपमा, डॉ स्मिता सहित सभी शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।