हरिद्वार, 24 मई (हि.स.)। महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने कहा कि आज सनातन धर्म अभूतपूर्व संकट में है। हर ओर से सनातन धर्म को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। हमारी कमजोरी का सबसे बड़ा कारण यह है कि हमने अपने धर्म को छोड़ दिया है। यह बात मंगलवार को महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने कही।
सर्वानंद घाट पर आज महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि और स्वामी अमृतानंद ने पत्रकारों से वार्ता में अपनी भविष्य की योजनाओं को साझा किया। उन्होंने कहा कि हमारा त्यागा हुआ अरक्षित धर्म ही हमारे विनाश का कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि आज यदि हमें जीवित रहना है तो सनातन धर्म की ओर ही वापस लौटना पड़ेगा। अब हम दोनों हिन्दुओं के सनातन की ओर लौटने के मार्ग को प्रशस्त करने का प्रयास करेंगे।
जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी उर्फ वसीम रिजवी और अपने सम्बन्धों पर उन्होंने बताया कि भगवा में छिपे हुए मुसलमानों के दलाल ये झूठी अफवाह फैला रहे हैं कि मैंने उनका और उनके परिवार का उनके जेल में रहने के दौरान साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि मैं उन्हें बता दूं कि मेरे पास दलाली या किसी संस्था का कोई पैसा नहीं है। मेरे पास तो धर्म का पैसा है। इसीलिये मेरा दिया हुआ अधिकांश सहयोग बैंक के माध्यम से हुआ है।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सारे खर्च को बैंक के माध्यम से किया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग ये कह रहे हैं कि हम जितेन्द्र नारायण त्यागी को जेल से लेने नहीं गए वो बताएं कि त्यागी जी के जमानतियों की व्यवस्था करके उनके वेरिफिकेशन में कौन लोग लगे हुए थे। हमारे पास हमारी एक एक बात का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज ये कह रहे हैं की हमारे और त्यागी जी के संबंधों में दरार पड़ गई है तो वो समझ ले की संबंध दो तरफ से निभाए जाते हैं, एक तरफ से नहीं।
उन्होंने कहा कि जितेन्द्र नारायण आज जिनके साथ हैं वो मीडिया मैनेज करके मेरी विश्वसनीयता को समाप्त करने पर तुले हैं। त्यागी जी की क्या मजबूरी है, ये त्यागी जी जानें, परन्तु मैं किसी भी व्यक्ति को अपना चरित्र हनन नहीं करने दूंगा। जो जिस भाषा में समझेगा, उसे उसी भाषा के ठीक से उत्तर देने का हर संभव प्रयास करुंगा।
प्रेस वार्ता में स्वामी अमृतानन्द महाराज ने कहा कि अब हम योगेश्वर की गीता को आधार बनाकर अपने धर्म के प्रचार का कार्य करेंगे और सम्पूर्ण विश्व को सनातन धर्म समझाने का प्रयास करेंगे। ताकि दुनिया धर्म और अधर्म के अंतर को समझ सकें।