हरिद्वार, 18 मई (हि.स.)। चिन्ता इंसान के लिए घातक है। यह मस्तिष्क को चोट देने के साथ ही शरीर को भी नुकसान पहुंचाती है। इस दौड़.भाग में हम लोगों की जिंदगी में एग्जायटी का होना बहुत आम बात है। रिश्तों में विश्वास की कमी, एक दूसरे से आगे निकलने की दौड़, असुरक्षित महसूस करना, लड़ाई-झगड़ा, गलत व्यवहार, अनियमितता, समाज से दूर रहना, अपनी ही जिंदगी में लीन रहना यह सब बेचैनी के कारण हैं। हरिद्वार गुरुकुल कांगडी समविश्वविद्यालय मे एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिवकुमार चौहान शारीरिक शिक्षा के छात्रों को मनोविज्ञान के माध्यम से चिन्ता तथा तनाव के प्रभाव, स्थिति को समझने तथा इसके बचाव सम्बंधी विषयों पर व्याख्यान के दौरान यह बात कही।
डॉ. शिवकुमार चौहान ने कहा कि चिन्ता तो हर किसी को होती है, परन्तु इसे बीमारी के तौर पर पहचानना मुश्किल है। चिन्ता, अवसाद, निराशा व दुःख से जन्म लेती है। जब हम अपनी भावनाओं को अनदेखा करते हैं तो वे हमारे दुःख का कारण बनती हैं। ठीक इसी प्रकार नजरअंदाज किए जाने पर अवसाद चिन्ता का रूप ले सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति को हर वक्त इस बात का डर लगा रहता है कि कुछ गलत होने वाला है। यह घबराहट के दौरे या पैनिक अटैक होते हैं। उन्होंने कहा कि चिन्ता के दौरे में व्यक्ति को हर समय चिंता, डर व घबराहट महसूस होती है। इसके अलावा उलटी व जी मिचलाने की समस्या भी महसूस होती है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और सांस फूलने लगती है। अगर ऐसा बार बार होता है तो चिकित्सक से जरूर संपर्क करें अन्यथा ये जानलेवा भी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को चिंता किसी भी चीज से किसी भी समय हो सकती है, लेकिन अगर सही समय पर उसका इलाज न किया जाए तो यह अवसाद का रूप ले सकती है और पीडि़त व्यक्ति को घबराहट और चिंता के दौरे पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं, परन्तु इस समस्या की गंभीरता को कम नहीं समझना चाहिए। अगर चिन्ता के एक भी लक्षण से आप अथवा आपका परिवार का कोई व्यक्ति या जान पहचान का कोई इंसान पीडि़त है तो सबसे अच्छा यही है कि इलाज के लिए आप किसी अच्छे चिकित्सक, मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक की मदद लें।