दुराचार मामले में पीड़िता का बयान दर्ज न करने पर कोर्ट खफा, पुलिस अधिकारी तलब

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प्रयागराज, 19 मई (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामूहिक दुराचार मामले में विवेचक द्वारा पीड़िता का आडियो वीडियो बयान दर्ज न कर कानून का उल्लघंन करने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एस पी रामपुर वर्तमान ए एस पी मिलख व विवेचनाधिकारी दरोगा को स्पष्टीकरण के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने एसपी रामपुर से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर सफाई मांगी कि दुराचार पीड़िता का आडियो वीडियो बयान दर्ज करने के कानून का पालन क्यों नहीं किया गया। और उन्होंने निष्पक्ष विवेचना के लिए क्या कार्रवाई की। कोर्ट ने यह भी बताने को कहा कि पिछले एक साल में कितने केस में बयान दर्ज करने में संशोधित कानून का पालन किया गया।

कोर्ट ने विवेचक दरोगा से पूछा कि पीड़िता का बयान दर्ज क्यों नहीं किया। यदि किया है तो आडियो वीडियो पेश करें। साथ ही आरोपियों से मिलीभगत के पीड़िता के आरोप का जवाब दें। याचिका की सुनवाई 26 मई को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने दुराचार के आरोपी वसीम की आपराधिक अपील की सुनवाई करते हुए दिया है।

पीड़िता ने कोर्ट में बयान दर्ज कराया जिसमें पांच लोगों सनिव, नाजीव, शफीक, नाजिम व वसीम पर सामूहिक बलात्कार करने का आरोप लगाया है। घटना रामपुर के टांडा थाने की है। पुलिस ने चार आरोपियों को छोड़ दिया और एक आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसका बयान दर्ज नहीं किया। और उसके परिवार को केस वापस लेने की धमकी दी जा रही है। उसके जीवन को खतरा है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी विवेचक पीड़िता के घर कई बार आया और दबाव बना रहा है।

कोर्ट ने कहा एससी-एसटी एक्ट के उपबंधो व 11 अगस्त 21 के परिपत्र का पालन नहीं किया गया। चार आरोपियों के खिलाफ फाइनल रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की गई। सही विवेचना न करने की शिकायत के बावजूद एसपी ने दुबारा विवेचना करने का आदेश नहीं दिया। जिस पर कोर्ट ने कड़ रूख अपनाया है।