रतलाम: सनातन परंपरा में हर माह पर्व एवं उत्सवों से भरा है

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रतलाम, 19 अप्रैल (हि.स.)। मालवांचल लोक कला एवं संस्कृति संस्थान में लोककथा – वार्ताओं पर आधारित चैत्र माह के विशेष सन्दर्भ में मंगलवार लवारलवालवलएक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारतीय संस्कृति की सनातन परंपरा में हर माह पर्व उत्सवों से भरा है । चैत्र मास के पर्व नव वर्ष के उल्लास के साथ जीवन को ऊर्जावान बनाते है । कार्यक्रम मे चैत्र माह के पर्वों को रेखांकित करते हुए नवसंवत्सर, गणगौर महापर्व, राम नवमी हनुमान जन्मोत्सव आदि पर उपस्थित सुधीजनों एवं अतिथियों ने प्रकाश डाला । संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ ऊषा व्यास ने की। डॉ मंगलेश्वरी जोशी ने मुख्य आतिथ्य प्रदान किया ।

रश्मि उपाध्याय ने चैत्र माह की अगुवानी को स्पष्ट करते हुए कहा कि फाल्गुन वर्ष का अंतिम छोर है जो पूरे उल्लास के साथ हमारी संस्कृति में उकेरा गया है और उसी आनन्दमयी चेतना के साथ नव वर्ष का स्वागत भी ! चैत्र के ये पर्व भौगोलिक परिवर्तन जलवायु के परिवर्तन एवं ऋतु परिवर्तन के साथ नववर्ष में प्रवेश करते हैं । रश्मि उपाध्याय ने शीतला पर्व के महत्व एवं मनुष्य के स्वास्थ्य संजीवनी पर अपने विचार एवम अनुभव को व्यक्त किया ।

वनिता भट्ट ने चैत्र में पढऩे वाली राम नवमी के विशेष सन्दर्भ में राम के चरित्र उनके धनुष भंग की लीला पर प्रकाश डालते हुए चैत्र में बुंदेलखंड में जो बन्देली में गाये जाने वाले राम जन्मोत्सव एवम विवाह के गीतों को प्रस्तुत किया ।

धर्म जीवन की प्राणवायु है

पूर्णिमा गुप्ता ने अपने वक्तव्य में कहा कि धर्म जीवन की प्राणवायु है और पर्व जीवन का विज्ञान ! मेवाड़ में गणगौर पर्व की समृद्धशाली परम्परा मालवा की मिठास पर्वों में ऐसा रस घोलती है कि जीवन को आनन्दित उल्लासित कर देती है । हमारे त्यौहारों को अनदेखा करना अर्थात हमारी आने वाली पीढ़ी को कमजोर करना है ।

पर्व हमारी धरोहर है

कविता व्यास ने नवरात्रि में देवी पूजन विषयक आस्थाओं पर बल देते हुए कहा कि ये पर्व हमारी धरोहर है ।ये हमे मजबूत बनाते है कहते हुए अपनी बात रखी । अनुराधा खरे लोक पर्वो की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि चैत्र का बड़ा लोक पर्व गणगौर है गणगौर की कथा के संदर्भ उन्होंने कहा कि शिव पार्वती का जीवन से मानव जीवन मे आदर्श स्थापित करता है ।

छाया शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राम का जीवन जनमानस को प्रेरणा प्रदान करता है । राम चरित मानस में जीवन का संदेश छुपा है ।

सरिता दशोत्तर ने लोक पर्वों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि पर्व हमारी पूंजी है, हमारी विरासत है । हमारी संस्कृति से आने वाली पीढ़ी को सींचना बहुत जरूरी है । बच्चों ने संस्कार डालने की बहुत आवश्यक है।

लोक वार्ता का लिखित साहित्य नही होता

डॉ शोभना तिवारी ने कहा कि लोक पर्वो को लोक चेतना में पुनरस्थापित करने की महती आवश्यकता है । चैत्र के सभी पर्वों को रेखंकित करते हुए डॉ शोभना तिवारी ने कहा कि गणगौर लोक चेतना का महापर्व है ,जिसमे शिव पार्वती मृत्यु लोक में भ्रमण करते हुए मनुष्य की लोक चेतना में विचरण करते है । लोक वार्ता का लिखित साहित्य नही होता । ये वार्ताएं पीढिय़ों से हस्तांतरित होती चली आई है। इनकी भाषा में देशज क्षेत्रीय बोलियों की बुनावट होती है। चैत्र को श्रंगार का मास कहा जाता है बसन्त अपने पूरे वैभव से प्रकृति में प्रकट होता दिखाई पड़ता है। चैत्र माह में चैती गीत गाये जाते है जो एक उपशास्त्रीय विधा है । शोभना तिवारी ने चैती के श्रृंगार गीत की एक बानगी प्रस्तुत की ।

मुख्य अतिथि डा.मंगलेश्वरी जोशी ने अपने वक्तव्य में लोक कथा वार्ता को विस्तार से स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारी धर्म संस्कृति और ये सनातन परंपरा लोक कथा-वार्ताओं पर ही जीवंत है ।

पर्व-उत्सव हमारी सम्पत्ति है

अध्यक्षता कर रही डॉ उषा व्यास ने कहा कि पर्व – उत्सव हमारी सम्पत्ति है जो अदम्य आस्थाओं से संपृक्त हैं। ग्रन्थों में हाइजीन छिपा है जो हमारे जीवन की संजीवनी है । डॉ उषा व्यास ने राम के लोक नायकत्त्व एवं हनुमान की भक्ति की पराकाष्ठा पर अपने विचार व्यक्त किये।