देश में हिंदुत्व का वातावरण तैयार हो रहा : क्षेत्रीय प्रचारक महेंद्र

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– राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अम्बेडकर शाखा ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष के रूप में मनाया

मुरादाबाद 02 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की साप्ताहिक लगने वाली अम्बेडकर शाखा ने सिविल लाइन्स स्थित शहनाई मंडप में शनिवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को धूमधाम से नववर्ष के रूप में मनाया। इस आयोजन में स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया।

मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक महेंद्र ने कहा कि हमें युवा पीढ़ी से स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए आह्वान करना चाहिए। तभी हमारा भारत आगे बढ़ेगा और पुनः विश्व में विश्व गुरु का स्थान लेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं और देश में हिंदुत्व का वातावरण तैयार हो रहा है। हिंदुत्व और राष्ट्रभक्ति जुड़ी हुई हैं।

आगे उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को यह बताना आवश्यक है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इस दिन को अनेक विशेष के लिए याद किया जाता है। लोग अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वाधान में एक वर्ष में छह उत्सव मनाए जाते हैं, जिसमें वर्ष प्रतिपदा उत्सव, हिंदू साम्राज्य दिवस, गुरु पूर्णिमा उत्सव, रक्षाबंधन उत्सव, विजयदशमी और मकर सक्रांति का पर्व है।

उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अंग्रेजी नववर्ष तो याद रहता है मगर नव संवत्सर वह भूल जाते हैं जबकि नव संवत्सर के दिन ही इस सृष्टि की स्थापना हुई थी।

अंग्रेजी कैलेंडर में कोई माह 30 दिन का होता है तो कोई माह 31 दिन का होता हैं। 1 माह तो 29 दिन का भी होता हैं। जबकि हिंदी कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक माह 30 दिन का होता है। हमारे विद्वानों ने चंद्रमा, पृथ्वी, नक्षत्र की गति मिलाकर दिनों की व महीनों की रचना की हैं। हिंदी वर्ष में 12 माह होते हैं प्रत्येक माह के 2 पक्ष होते हैं जिसमें एक कृष्ण पक्ष दूसरा शुक्ल पक्ष कहलाता है। प्रत्येक पक्ष में 15 तिथि होती हैं प्रत्येक तिथि का शुभारंभ ब्रह्म मुहूर्त में होता है। विदेशियों ने भारत के खगोल विज्ञान को हमेशा सही माना। क्योंकि भारत की कालगणना बहुत ही बारीकी से की गई थी।

क्षेत्रीय प्रचारक ने कहा कि चार युग होते हैं, जिसमें सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग हैं। कलयुग सबसे छोटा होता है, इसकी अवधि 432000 वर्ष हैं। द्वापर युग कलयुग से दोगुना था। द्वापर युग की अवधि 864000 वर्ष थी। त्रेता युग कलियुग से तिगुना था। त्रेता युग की अवधि 1296000 वर्ष थी और सतयुग कलयुग से चौगुना था सतयुग की 1728000 वर्ष थी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी सुभाष भाटिया ने की, संचालन रूपचंद ने किया। इस अवसर पर क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य मनीराम, विभाग संघचालक ओम प्रकाश शास्त्री, महानगर संघचालक डॉ विनीत गुप्ता, नगर संघचालक सुभाष कत्याल, विभाग प्रचारक वतन कुमार, महानगर प्रचारक विवेक कुमार, महानगर कार्यवाह सुरेंद्रपाल सिंह, गोपाल टंडन, अनिल सिक्का, अनिल चौधरी राहुल जैन, धवल दीक्षित सहित अनेक वरिष्ठ स्वयंसेवक उपस्थित रहे।