मथुरा, 07 मार्च (हि.स.)। वृंदावन नगर के टटिया स्थान मार्ग स्थित राधारंगीली कुंज में त्रिदिवसीय श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्योत्सव एवं रंगीली होली महोत्सव का समापन सोमवार विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों हो गया।
सोमवार बनविहारी पाठक ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु राधामाधव के मिलित अवतार थे। वृंदावन में इमलीतला नामक स्थान पर उन्होंने अपनी लीलाओं का स्मरण कर ब्रजधाम को पुनः उद्घाटित किया था। नाभा पीठाधीश्वर सुतीक्षण दास ने कहा कि नाम संकीर्तन ही कलियुग में जीव के कल्याण का एक मात्र साधन है।
डा. रमेशचंद्राचार्य ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु ने हरिर्नाम संकीर्तन द्वारा जीवमात्र के कल्याण का मार्ग दिखाया है। बिहारीलाल वशिष्ठ ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु ने कृष्णकालीन लीला स्थलियों को पुनः प्रकट व उद्घाटित कर ब्रजधाम के वर्तमान स्वरूप की स्थापना की।
इस अवसर पर महंत हरिदास, प्रियाशरण भक्तमाली, कुंजबिहारी दास, राघव दास, वेणुगोपाल दास, किशोरी शरण भक्तमाली, दिनेशचंद्र गोस्वामी, दीपक शास्त्री, चैतन्य किशोर कटारे, अशोक शर्मा, रविकृष्ण शास्त्री, साध्वी पूनम, अरविंद शास्त्री, महंत भरतदास भक्तमाली, हरिचरण दास, चंद्रप्रकाश शर्मा, ध्रुव शर्मा आदि उपस्थित थे।
गौरतलब हो कि, शनिवार महंत राधामोहनदास रंगीली सखी के सानिध्य में मंगल घट स्थापना के साथ दीप प्रज्वलन, चैतन्य महाप्रभु नित्य पार्षद षड्गोस्वामीयों का आह्वान पूजन तथा अधिवास व अखंण्ड संकीर्तन हुआ। वहीं महाराजश्री व कलाकारों द्वारा होली व समाज गायन किया गया। प्रभात फेरी उपरांत श्रीराधा नाम संकीर्तन, महाप्रभु की बधाई गान, रासलीला समेत ओडिसी नृत्य में गौरांगी ने गीतगोविंद के पदों पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसे देखकर उपस्थित भक्त भावमग्न हो गए।