होली विशेष : शरीर पर रंग लगना ही रंग चिकित्सा : सतीश राय

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–रंग चिकित्सा का विज्ञान अति प्राचीन

प्रयागराज, 17 मार्च (हि.स.)। शरीर पर रंग लगाना ही रंग चिकित्सा है अर्थात कलर थेरेपी। यह वैकल्पिक चिकित्सा का एक रूप है। जिसमें शरीर, मन और आत्मा में सामंजस्य स्थापित होता है। शरीर में ऊर्जा के केंद्र हमारे चक्र हैं। प्राकृतिक रंगों के प्रयोग से शरीर में स्थित प्रमुख चक्रों को शक्ति मिलती है और चक्रों से सम्बंधित बीमारियां ठीक होती हैं। रंग चिकित्सा का विज्ञान अति प्राचीन है।

यह बातें एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण और प्राकृतिक संस्थान, प्रयागराज रेकी सेंटर पर गुरूवार को स्पर्श ध्यान प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में स्पर्श चिकित्सक सतीश राय ने कही। उन्होंने कहा इसे क्रोमोथैरेपी भी कहते हैं। ग्रीक भाषा में क्रोमो का अर्थ रंग है इसके इलाज में दवा का प्रयोग नहीं होता, बल्कि रंग लगाकर शारीरिक ऊर्जा को संतुलित किया जाता है। चिंता-तनाव और भावनाओं से जुड़ी समस्याओं का इसमें कारगर इलाज है।

सतीश राय ने कहा कि विभिन्न प्रकार के अबीर, रंग, गुलाल से होली जरूर खेलनी चाहिए। होली त्यौहार में बिना किसी संकोच के रंग लगाकर कहीं भी आ जा सकते हैं। होली में रंग खेल कर कई बीमारियों को दूर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि रंगों पर आधारित हीलियो थेरेपी भी है। हीलियो का अर्थ सूर्य और थेरेपी का अर्थ चिकित्सा से है। प्राचीन रोम में हीलियो थेरेपी अर्थात सूर्य चिकित्सा का भी उल्लेख मिलता है। सूर्य की किरणों में 7 मुख्य रंग होते हैं और हमारे शरीर में भी सात प्रमुख चक्र होते हैं। सूर्य के सातों रंग ही हमारे चक्रों के भी रंग हैं।

स्पर्श चिकित्सक ने बताया कि पहला ब्रह्म (सहस्त्रार )चक्र, इसका रंग बैगनी है यह रंग हमारे मांसपेशियों के खिंचाव तनाव को कम करता है, बुखार में आराम देता है। दूसरा आज्ञा चक्र है जो गहरा नीला रंग शरीर की पैराथायराइड ग्रंथियों को सक्रिय करता है, भावनात्मक उत्तेजना को कम करता है। तीसरा कंठ चक्र आसमानी रंग पिट्यूटरी ग्रंथि को सक्रिय करता है। बुखार तथा शरीर के जलन को शांत करता है। चौथा हृदय चक्र हरा रंग शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। शरीर के कीटाणुओं को नष्ट करता है रक्त को शुद्ध करता है। पांचवा मणिपुर चक्र पीला रंग शरीर के हारमोंस के उत्पाद में वृद्धि करता है, पाचन क्रिया को ठीक करता है, पूरे शरीर तथा मस्तिष्क को शक्ति देने के साथ फेफड़े को ठीक करता है। छठवां स्वाधिष्ठान चक्र नारंगी रंग रक्तचाप में वृद्धि, सेक्स से सम्बंधित भावनाओं को उत्तेजित करता है, एडिशनल ग्रंथि तथा गुर्दा के लिए लाभदायक है। सातवां मूलाधार चक्र लाल रंग शरीर के अंगों को शक्ति प्रदान करता है, शरीर में रक्त की क्रियाशील को बढ़ाता है। इसके रंग से बने तेल का प्रयोग जोड़ों के दर्द, सर्दी जुकाम से होने वाले दर्द, लकवा, मोच में लाभप्रद माना जाता है।