यूक्रेन से वापस लौटे छात्र ने बताई आपबीती, खौफ से निकलकर सरजमीं पर पाया सुकून

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एटा, 07 मार्च (हि.स.)। यूक्रेन में फंसे आवास विकास कॉलोनी निवासी चीफ फार्मासिस्ट डॉ. नरेश शाक्य का पुत्र अर्पित शाक्य आज अपने वतन लौट आया। अर्पित के घर पहुंचने के बाद आस-पड़ोस के लोग और रिश्तेदारों का तांता लग गया। वह अपने घर तो पहुंच गया, लेकिन उसे इस बात का दु:ख है कि अभी भी बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक और छात्र-छात्राएं वहां फंसे हुए हैं।

अर्पित शाक्य के पिता डॉ. नरेश शाक्य वीरांगना अवंतीबाई लोधी स्वशासी मेडिकल कॉलेज के चीफ फार्मासिस्ट है। बताया कि उनका बेटा अर्पित शाक्य डेनिप्रो विश्वविद्यालय यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। उनको पांच वर्ष हो चुके हैं। वह यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहता है। यूक्रेन सरकार के अलर्ट के बाद परिजन चिंतित थे, जिसके बाद उन्होंने टिकट बुक कराई।

एटा लौटे अर्पित ने कहा केंद्र सरकार को सभी भारतीय छात्रों को देश में लौटाने की व्यवस्था करानी चाहिए। बताया मैं तो समय से लौट आया, लेकिन यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले भारत के काफी छात्रों को बचाना चुनौती है। अर्पित ने बताया यूक्रेन में माइनस 21 डिग्री तापमान है, लेकिन यूनिवर्सिटी व हॉस्टल में रूम हीटर लगे हुए हैं। हालांकि एटा आकर ऑनलाइन पढ़ाई जारी है, जिससे पढ़ाई ज्यादा प्रभावित नहीं होगी।

अर्पित ने कहा कि 23 फरवरी को उनके हॉस्टल के पास तेज धमाका हुआ, जब उन्होंने खिड़की से झांककर देखा तो पता चला कि डेनिप्रो एयरपोर्ट पर रूस की मिसाइल गिरी थी। जिसे देखकर हॉस्टल में रह रहे सभी छात्र घबरा गये। सभी ने अपने वतन आने का मन बना लिया। यूक्रेन के अन्य हिस्सों में दिन प्रतिदिन हालात बिगड़ते जा रहे थे। उड़ानें भी रद्द कर दी गयी थीं। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि अब यहां से बाहर कैसे निकला जाए। परन्तु इसी बीच सीमावर्ती देशों से भारत ने उड़ान शुरू करा दीं, लेकिन वहां तक भी पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती भरा था।

डेनिप्रो से रोमानिया बार्डर की दूरी लगभग 1300 किमी है। बसें आसानी से नहीं मिल रही थीं। स्थानीय मित्रों की सहायता से एक बस मिली, जिसमें भारत आने वाले हम 60 छात्रों को सात लाख रुपये देने पड़े। रास्ते भर में चेक पोस्टों पर बस की कड़ी चेकिंग की गईं, परन्तु रोमानिया बार्डर पर किसी तरह की कोई समस्या नहीं हुई। 10 मिनट में सभी औपचारिकताएं पूरी करके रोमानिया के अंदर हम सभी छात्रों को प्रवेश दे दिया था।

रोमानिया कैम्प में रहने और खाने का इंतजाम भारतीय दूतावास की ओर से किये गये थे। चार मार्च की सुबह सुसेवा एयरपोर्ट से उन्हें फ्लाइट मिली। छह मार्च को सुबह 6 बजे वह दिल्ली पहुंच गये। सोमवार को टैक्सी से अपने निवास स्थान पहुंचे। परिवार के सदस्यों ने अर्पित के घर पहुंचने पर राहत की सांस जरूर ली, लेकिन पिता बोले सभी भारतीय छात्र हमारे बच्चों की तरह हैं। सरकार को उनकी सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए।