मऊ : पिता की राजनैतिक विरासत पाने में सफल हुए रामविलास और अब्बासअंसारी

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मऊ,11 मार्च (हि.स.)। राजनीतिक गुणा गणित में जनपद के दो नेताओं ने अपने-अपने पुत्र को राजनीतिक विरासत सौंपने में कामयाबी पायी है। या यूं यह कह लें कि पहली बार सदन जा रहे नेताओं ने अपने पिता की राजनैतिक विरासत को संभालने के लिए जनता से लगाई गुहार में सफलता हासिल कर ली है।

घोसी विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक चुने गए वर्तमान में बिहार के राज्यपाल फागू चौहान जब से बिहार के राज्यपाल बने मऊ में उनकी राजनैतिक जमीन उसर सी हो रही थी। वे उपचुनाव में ही बेटे को इस सीट से चुनाव लड़ाना चाहते थे। लेकिन भाजपा में मिले नए सम्मान के आगे वे पार्टी से बहुत कुछ नहीं कह सके। हां अलबत्ता 2022 के चुनाव में रामविलास चौहान मधुबन सीट से या घोसी से प्रत्याशी बनने की जुगत चुनाव की आगाज होते ही लगा दिए लेकिन काफी कशमकस के बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने मधुबन से जिम्मेदारी सौंपी। जहां पर उनका काफी विरोध भी हुआ। लेकिन अंत में वह मधुबन से भारतीय जनता पार्टी का विजय पताका फहराने में कामयाब ही नहीं हुए बल्कि विजय प्राप्त कर मऊ जनपद में भाजपा की इज्जत भी बचाई।। इसके साथ ही रामविलाश चौहान अपने पिता फागू चौहान की राजनीतिक विरासत को मऊ में संभालने में भी सफलता हासिल कर लिए।

यही नहीं मऊ जनपद के सदर विधानसभा सीट से पांच बार लगातार विभिन्न दलों व निर्दलीय विधायक रहे मुख्तार अंसारी के पुत्र अब्बास अंसारी ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी व समाजवादी पार्टी के बैनर पर जीत दर्ज कर न सिर्फ सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीतने का 2022 के विधानसभा में मऊ जनपद में रिकॉर्ड बनाया है। बल्कि अब तक पांच बार विधायक रहे अपने पिता के वोट पाने की संख्या व जीत के अंतर का भी रिकॉर्ड तोड़ा। अब्बास अंसारी अब मऊ में अपने पिता मुख्तार अंसारी के राजनीतिक विरासत को संभालेंगे। वे मऊ की आवाम के लिए अपने पिता के अधूरे कामों को पूरा करने का काम करेंगे। ऐसे में मऊ के राजनीतिक सरजमीं पर राजनीति के अलग-अलग क्षेत्र के धुरंधरों ने अपने बेटे को मऊ में राजनीति की विरासत को सौंप दी है। अब आने वाले दिनों में देखना होगा कि उनके यह पुत्र उनके तरह राजनीति के सूरमा साबित होते हैं या नहीं।