गौना कराने ससुराल पहुंचे काशीपुराधिपति, खास ‘रंगभरी ठंडई’ से बारात का स्वागत

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वाराणसी, 13 मार्च (हि.स.)। रंगभरी एकादशी की पूर्व संध्या पर रविवार की शाम काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ प्रतीक रूप से गौना कराने बारातियों के साथ ससुराल पहुंचे। काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ कुलपति तिवारी के टेढ़ीनीम स्थित आवास पर बाबा के बारात का लोगों ने गर्मजोशी से अनूठे अंदाज में स्वागत किया। हर वर्ष तो बारातियों का स्वागत ठंडई पिला कर किया जाता था। मगर इस बार दूल्हा बने बाबा विश्वनाथ पर ठंडई और गुलाबजल की फुहार उड़ा कर किया गया। इसके बाद फल, मेवा और बाबा के लिए खासतौर पर मिश्राम्बु द्वारा तैयार की गई ‘रंगभरी ठंडई’ से बारात का पारंपरिक स्वागत किया गया।

गौरा का गौना कराने बाबा विश्वनाथ के आगमन पर अनुष्ठान का विधान पं. सुनील त्रिपाठी के आचार्यत्व में किया गया। बाबा का अभिषेक करने के बाद वैदिक सूक्तों का घनपाठ किया गया। महंत डॉ कुलपति तिवारी के सानिध्य में विविध अनुष्ठान हुए। बाबा विश्वनाथ व माता पार्वती की गोदी में प्रथम पूज्य गणेश की रजत प्रतिमाओं को एक साथ सिंहासन पर विराजमान कराया गया। पूजन-आरती कर भोग लगाया गया। पहले डमरुओं की गर्जना हुई फिर महिलाओं और नगर के कलाकारों ने मंगल कामनाओं से परिपूर्ण पारंपरिक गीत लोकगीत गाये।

महंत कुलपति तिवारी ने बताया कि रंगभरी एकादशी पर 14 मार्च को बाबा के पूजन का क्रम ब्रह्म मुहूर्त में मंहत आवास पर आरंभ होगा। बाबा के साथ माता गौरा की चल प्रतिमा का पंचगव्य तथा पंचामृत स्नान के बाद दुग्धाभिषेक किया जाएगा। दुग्धाभिषेक पं. वाचस्पति तिवारी और संजीव रत्न मिश्र करेंगे। सुबह पांच से साढ़े आठ बजे तक 11 वैदिक ब्रह्मणों द्वारा षोडशोपचार पूजन पश्चायत फलाहार का भोग लगा महाआरती की जाएगी। दस बजे चल प्रतिमाओं का राजसी शृंगार एवं पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे भोग आरती के बाद के बाबा का दर्शन आम श्रद्धालुओं के खोला जाएगा। जन सामान्य के लिए दर्शन सायं पांच बजे तक खुला रहेगा। डमरू दल के सदस्यों के लिए दोपहर एक से तीन बजे तक समय निर्धारित किया गया है। कुलपति तिवारी ने बताया कि बाबा की पालकी की शोभायात्रा टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से विश्वनाथ मंदिर तक निकाली जाएगी। इससे पूर्व प्रात: साढ़े दस बजे से शिवांजलि संगीत समारोह का परंपरागत आयोजन होगा।