हरिद्वार, 06 मार्च (हि.स.)। अहम का भाव किसी भी समाज के पतन का मुख्य कारण है। निस्वार्थ भाव से काम करने वाला व्यक्ति समाज को संगठित एवं सक्रिय बनाने में कामयाब हो सकता है। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव और वैदिक विद्वान प्रो. भारत भूषण वेदालंकार ने यह उद्गार अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की उत्तराखंड प्रदेश कार्यकारिणी के एक कार्यक्रम में बतौर अध्यक्ष यह बात कही।
प्राे. भारत ने कहा कि समानता का अधिकार अहम को दूर करके परस्पर सहयोग की भावना को बढ़ाता है। व्यक्ति को अपने अहम को छोड़कर संगठन की शक्ति को बढ़ाने में अपना योगदान देना चाहिये, जिससे प्रगति के नये रास्ते बनते हैं। राजपूत धर्मशाला परिसर के पृथ्वीराज चौहान सभागार में आयोजित संगठन-शक्ति कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एवं अखिल राजपूत महासभा, फरीदाबाद के संस्थापक अध्यक्ष एसके सिंह का स्वागत किया गया।
उन्होंने समाज में राजपूत, चौहानों की स्थिति पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि अनेक समाज में अनेक जाति धर्मों को मानने वाले लोगों ने तरक्की की है। राजपूत-चौहान जैसे मजबूत संगठन ने देश के संगठानात्मक ढांचे तथा इतिहास में बेजोड़ जिम्मेदारी निभाई है। परन्तु आज स्थिति बिल्कुल अलग है। प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर यशपाल सिंह राणा ने कहाकि आज सभी को सचेत होने की जरूरत है। अन्यथा वर्तमान स्थिति के लिए आने वाली पीढियं हमें कभी माफ नहीं करेंगी। प्रदेश महासचिव डॉ. शिवकुमार चौहान ने कहाकि समाज की विघटनकारी परिस्थिति तथा अलगाववाद को दूर करने के लिए संगठन स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है।
शिक्षाविद्व योगेन्द्रपाल सिंह राठौर एवं लोकेन्द्र पाल सिंह ने पुरातन सम्पदाओं के संरक्षण एवं उनके इतिहास को संजोने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहाकि इतिहास प्रत्येक काल में जागृति का सशक्त माध्यम रहा है। जिसको जानना एवं उसका संरक्षण करना जरूरी है।
इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेमसिंह राणा, महेन्द्र सिंह नेगी, डॉ. बिजेन्द्र सिंह, सुशील पुंडीर, अजय चौहान, मदनपाल सिंह पुण्डीर, स्वामी प्रेमविक्रम सिंह, दिनेश सिंह, रवि किशोर चौहान, राजीव चौहान, पंकज कुमार, राजेश चौहान, सुधीर सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन अजय चौहान ने किया।