अंगवस्त्रम, 51 हजार रूपये व प्रमाणपत्र प्रदान किया गया
संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए डॉ वंदना द्विवेदी ने किया है उल्लेखनीय कार्य
प्रयागराज, 06 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् लखनऊ की एक ओर से 2020 का व्यास पुरस्कार नवयुग कन्या महाविद्यालय लखनऊ की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वंदना द्विवेदी को रविवार को प्रदान किया गया। कोरोना संकट के कारण पुरस्कार डाक विभाग द्वारा प्रेषित किया गया है। संस्थान की ओर से डॉ वंदना द्विवेदी को अंगवस्त्रम्, 51 हजार का चेक तथा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। यह सम्मान घर में प्राप्त होने पर डॉ वंदना द्विवेदी ने अपनी माँ के हाथ से ग्रहण कर आशीर्वाद लिया।
उन्होंने सम्मान के लिए प्रदेश सरकार और संस्कृत संस्थान को धन्यवाद ज्ञापित किया है। डॉ. वंदना द्विवेदी के तीन बडे़ भाई हैं। इनके सबसे बडे़ भाई डीजीपी गोवा हैं तथा दूसरे भाई मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा में और तीसरे भाई नेहरु ग्राम भारती विवि प्रयागराज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। इनके पति आईएएस डॉ. आशुतोष द्विवेदी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ में कुलसचिव पद पर कार्यरत हैं।
व्यास पुरस्कार प्राप्त डॉ वन्दना द्विवेदी वर्तमान में संस्कृत विभाग नवयुग डिग्री कॉलेज राजेंद्र नगर, लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। डॉ वंदना ने संस्कृत भाषा में कुंभ मीमांसा नामक पुस्तक लिखी है, जिसमें चारों कुंभ का विस्तृत वर्णन हुआ है। पुस्तक में कुंभ के सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है।
मूलतः आजमगढ़ निवासिनी डॉ वंदना द्विवेदी की शिक्षा-दीक्षा इंटरमीडिएट तक आजमगढ़ में और उच्च शिक्षा स्नातक एवं स्नातकोत्तर डी.फिल इलाहाबाद विश्वविद्यालय से किया है। उन्होंने यूजीसी, नेट भी क्वालीफाई किया है। उच्च शिक्षा सेवा आयोग उत्तर प्रदेश प्रयागराज से 2009 में असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन हुआ तथा 2010 में अग्रसेन महिला पीजी कालेज आजमगढ़ में सहायक आचार्य संस्कृत के रुप में नियुक्ति हुयी। जुलाई 2019 तक आजमगढ़ में सेवारत थी जो वर्तमान में संस्कृत विभाग नवयुग कन्या महाविद्यालय राजेंद्रनगर, लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अध्यापन कार्य कर रही हैं।
डॉ वंदना द्विवेदी का कहना है कि जितना प्राचीन सनातन धर्म है, उतना ही प्राचीन संस्कृत भाषा भी है। इस बदलते दौर के साथ संस्कृत को विशेष सरकारी संरक्षण की जरूरत है। इसके लिए समाज और सरकार को विशेष ध्यान देना होगा, तभी संस्कृत संरक्षित होकर आगे बढ़ पाएगी और उसका लाभ समाज के सभी वर्ग को मिलेगा। उन्होंने कहा कि देवभाषा संस्कृत जन-जन की भाषा कैसे हो और इसका संवर्द्धन और संरक्षण कैसे हो इसके लिए सभी को आगे आना चहिये। डॉ वंदना ने कहा कि आज इस कम्प्यूटर के युग में संस्कृत संगणक के लिए सर्वोत्तम वैज्ञानिक भाषा है क्योंकि कूट शब्दों अर्थात कोड वर्डस् निर्माण में संस्कृत की अगाध गति है। संसार में इसके व्याकरण जैसा कोई दूसरा व्याकरण नहीं है।