दो युवकों के मिले शव की सीबीआई को शीघ्र जांच पूरी करने का निर्देश

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मामले में लापरवाही बरतने वाले वाराणसी पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ सरकार को कार्रवाई करने की छूट

प्रयागराज, 07 मार्च (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के लापता शुभम केसरी व रवि पांडेय की मिर्जापुर में हत्या कर लाश जलाने की जांच सीबीआई को सुपुर्द करने के बाद मृतकों को दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निस्तारित कर दी है।

कोर्ट ने वाराणसी की चौक कोतवाली, जैतपुरा, पांडेपुर व अपराध शाखा की लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर छोड़ दी है। कोर्ट पहले ही एसआईटी व राज्य सरकार को 18 जनवरी 21 को दर्ज एफआईआर की जांच पत्रावली सीबीआई को सुपुर्द करने का निर्देश जारी कर चुकी है। और सीबीआई से हत्या मामले की यथाशीघ्र जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एस.पी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति शमीम अहमद की खंडपीठ ने शिवम केशरी व अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। मालूम हो कि याची ने 26 अक्टूबर 20 व 31 दिसम्बर 20 को शुभम केसरी के लापता होने की शिकायत चौक थाना वाराणसी को दी। पुलिस ने सुनील निगम व गौरव निगम के नामजद होने के बावजूद कोई विवेचना नहीं की तो याची ने हाईकोर्ट की शरण ली। 5 जनवरी 21 को हाईकोर्ट के आदेश के बाद वाराणसी पुलिस जीडी में लापता रिपोर्ट दर्ज कर चुप्पी साधे रखी।

15 जनवरी को मिर्जापुर में दो लोगों की अधजली लाश बरामद हुई। पता चला वह लापता शुभम केसरी व रवि पांडेय की लाश है। पहचान छिपाने के लिए हत्या कर लाश जला दी गई।

कोर्ट ने एसएसपी वाराणसी को कड़ी फटकार लगाई तो 19 जनवरी को सुनील निगम की गिरफ्तारी की गई और लापता केसरी की मोटरसाइकिल टीवीएस अपाचे बरामद की गई। किन्तु किसके कब्जे से बरामद किया, नहीं बताया गया। यह भी नहीं बताया कि लापता होने की नामजद रिपोर्ट के बाद भी विवेचना क्यों नहीं की गई।

मिर्जापुर पुलिस ने वाराणसी एसटीएफ को केस स्थानांतरित किया। कोर्ट ने एसएसपी व वाराणसी के थानों की पुलिस की भूमिका को संदेहास्पद करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और सरकार को पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने ड्यूटी पालन में घोर लापरवाही बरती और जीवन के मूल अधिकारों का हनन किया। कोर्ट के निर्देश की अवहेलना की।

कोर्ट के सख्त रूख के बाद अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि जांच सीबीआई को सुपुर्द की जा रही है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि इससे पुलिस विवेचना की विश्वसनीयता घटी है। लापता होने की रिपोर्ट की ईमानदारी और निष्पक्ष विवेचना नहीं की गई। ऐसी पुलिस अपराध की विवेचना करने लायक ही नहीं है।

सरकार से जब पूछा गया कि लापरवाह पुलिस के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई तो अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कि सरकार ऐक्शन लेगी। कोर्ट ने सीधे निर्देश न देकर सरकार पर छोड़ दिया कि पुलिस पर कार्रवाई करे।