लखनऊ, 24 मार्च(हि.स.)। शपथ ग्रहण समारोह के कारण लखनऊ आये भाजपा कार्यकर्ताओं ने बागी बलिया की बाटी चोखा दुकान को फिर एक बार बाटी का स्वाद चखने के लिए चुना और बड़ी संख्या बाटी का स्वाद चखने पहुंचे।
लखनऊ के राजनीतिक इतिहास को देखें तो दारुलशफा कालोनी में बाटी चोखा की कई दुकानें खुली और बंद हो गयी। इसी में बागी बलिया की दुकान खुली और अपनी पहचान बना लिया। इस दुकान की करारी बाटी और आलू-बैंगन के चोखे का आनंद लेने वैसे तो वर्षभर लोग आते हैं लेकिन आजकल यहां भाजपा के कार्यकर्ताओं की भीड़ हो रही है। हालत यह है कि दुकान के भीतर बैठने की जगह नहीं बच पा रही है और भाजपा कार्यकर्ता अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
बाटी-चोखा की दुकान पर मालिक और कारीगर दोनों ही भूमिका में रहने वाले विजय ने कहा कि भाजपा की जीत से कार्यकर्ताओं में उत्साह हैं और दुकान में 11 बजे के बाद से लगातार संख्या बढ़ी हुई है। यही कारण है कि वे दोगुनी रफ्तार से बाटी बना रहे हैं। बाटी पूरी तरह से तैयार होने में कुछ मिनट तो लेती ही है। लेकिन बाटी के तैयार होने और परोसते ही खत्म होने का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा है।
उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के बलिया क्षेत्र के एक व्यक्ति की सोच थी, जब ये दुकान तैयार हुई थी। आज ये बहुत सारे लोगों के दोपहर और रात्रि के भोजन की व्यवस्था करती है। बाटी-चोखा के साथ ही चावल, दाल और टमाटर चटनी भी उनके यहां उपलब्ध है। जो पुराने लोग हैं, वे तो उनके यहां ही आना पसंद करते हैं।
आनन्द मिश्रा ने बताया कि बाटी-चोखा तो सबसे शुद्ध भोजन है। धीमी आंच पर पकी हुई बाटी और दाल खाने के बाद ठंडा पानी मिल जाये तो क्या पूछना है। वे बीते छह वर्षो से बागी बलिया की दुकान पर ही बाटी चोखा खाते आये हैं। यहां बाटी चोखा उनके बजट में भी रहती है और पेट भी भर जाता है।