सरस जनवाद

भारत में 41,806 और लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए

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भारत में 41,806 और लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद महामारी के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 3,09,87,880 पर पहुंच गयी जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 4,32,041 हो गयी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के गुरुवार को सुबह आठ बजे तक अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 2,095 मामलों की वृद्धि हुई है। उपचाराधीन मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों की 1.39 प्रतिशत है जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने वाले लोगों की राष्ट्रीय दर 97.28 प्रतिशत है।

मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को कोविड-19 के लिए 19,43,488 नमूनों की जांच की गयी जिससे अभी तक देश में इस महामारी का पता लगाने के लिए किए गए नमूनों की जांच की संख्या 43,80,11,985 हो गयी है जबकि दैनिक संक्रमण दर 2.15 प्रतिशत दर्ज की गयी। यह लगातार 24 दिनों से तीन प्रतिशत से कम है।

देशव्यापी टीकाकरण अभियान
साप्ताहिक संक्रमण दर 2.21 प्रतिशत है। आंकड़ों के मुताबिक, इस बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 3,01,43,850 हो गयी है जबकि मृत्यु दर बढ़कर 1.39 प्रतिशत हो गयी है। देशव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 39.13 करोड़ खुराक लगायी गयी हैं। देश में पिछले साल सात अगस्त को संक्रमितों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त को 30 लाख और पांच सितम्बर को 40 लाख से अधिक हो गई थी।

वहीं, संक्रमण के कुल मामले 16 सितम्बर को 50 लाख, 28 सितम्बर को 60 लाख, 11 अक्टूबर को 70 लाख, 29 अक्टूबर को 80 लाख, 20 नवम्बर को 90 लाख के पार हो गए। देश में 19 दिसम्बर को ये मामले एक करोड़ के पार, चार मई को दो करोड़ के पार और 23 जून को तीन करोड़ के पार चले गए थे।

वैक्सीनेशन सेंटर बंद करने की मजबूरी
बता दें कि पिछले कुछ दिनों में दिल्ली, महाराष्ट्र सहित कई राज्य लगातार वैक्सीन की कमी का दावा करते हुए वैक्सीनेशन सेंटर बंद करने की मजबूरी जाहिर कर चुके हैं। इस पर हाल में स्वास्थ्य मंत्री बने मनसुख मंडाविया ने वैक्सीन की कमी से जुड़े बयानों को न सिर्फ निरर्थक बताया है बल्कि उन्होंने कहा है कि ऐसे बयान लोगों में घबराहट पैदा करने के लिए दिए जा रहे हैं।

बुधवार को केंद्रीय मंत्री ने सिलसिलेवार ट्वीट्स के जरिए वैक्सीन की किल्लत के दावों को खारिज किया। उन्होंने लिखा, ‘वैक्सीन की उपलब्धता के संदर्भ में मुझे विभिन्न राज्य सरकारों और नेताओं के बयान एवं पत्रों से जानकारी मिली है। तथ्यों के वास्तविक विश्लेषण से इस स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। निरर्थक बयान सिर्फ लोगों में घबराहट पैदा करने के लिए दिए जा रहे हैं।’