सरस जनवाद

देश में फिर बढ़ने लगे कोरोना के मामले, तीसरी लहर का खतरा गहराया

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देश में कोरोना की तीसरी लहर का खतरा गहरा गया है। दूसरी लहर धीमी पड़ने के बाद पहली बार देश में 10 फीसद से अधिक संक्रमण दर वाले जिलों की संख्या बढ़ी है। राहत की बात यह है कि ऐसे जिले अभी तक मुख्य रूप से केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों में सीमित हैं।स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक एक तरफ पिछले तीन हफ्ते से कोरोना के सक्रिय मामलों में गिरावट थम गई है, वहीं दूसरी तरफ 10 फीसद से अधिक संक्रमण दर वाले जिलों की संख्या बढ़ने लगी है। फिलहाल इसे कोरोना की तीसरी लहर की शुरुआत नहीं कहा जा रहा है और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी अभी स्थिति पर नजर रखने की बात कर रहे हैं, लेकिन इसे तीसरी लहर के खतरे के संकेत के रूप में जरूर देखा जा रहा है।स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के अनुसार 10 फीसद से ज्यादा संक्रमण दर वाले 54 जिलों में केरल के 10, मणिपुर के 10, नागालैंड के सात, मिजोरम व मेघालय के छह-छह, अरुणाचल प्रदेश के पांच, राजस्थान के चार, सिक्किम के दो और हरियाणा, दमन व दीव, असम व पुडुचेरी के एक-एक जिले शामिल हैं। 16 जुलाई को इन जिलों की संख्या 47 थी। मणिपुर, केरल, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश और हरियाणा में 10 फीसद से ज्यादा संक्रमण दर वाले जिलों की संख्या बढ़ी है, वहीं राजस्थान में कम हुई है।16 जुलाई को जिन 47 जिलों में 10 फीसद से अधिक संक्रमण दर थी, उनमें से आठ जिलों में संक्रमण दर 10 फीसद से कम हो गई है। परंतु, 15 नए जिलों संक्रमण दर 10 फीसद से ज्यादा हो गई है।सिर्फ संक्रमण दर ही नहीं, कई जिलों में नए केस में तेज बढ़ोतरी भी ¨चता का सबब बन गया है। देश में 22 जिले ऐसे हैं, जिनमें नए मामले में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इनमें केरल के सात, मणिपुर के पांच, मेघालय व अरुणाचल प्रदेश के तीन-तीन, महाराष्ट्र के दो और असम व त्रिपुरा के एक-एक जिले शामिल हैं।देश में प्रतिदिन आने वाले नए केस में गिरावट थम गई है। पांच से 11 मई के बीच औसतन पौने चार लाख मामले प्रतिदिन मिल रहे थे, जो जून के अंतिम हफ्ते में गिरकर औसतन 48 हजार प्रतिदिन तक आ गए, लेकिन उसके बाद से मामलों में तेज गिरावट नहीं आ रही है। पिछले तीन हफ्ते से प्रतिदिन औसतन 38 हजार मामले सामने आ रहे हैं।नीति आयोग के सदस्य और टीकाकरण पर गठित टास्क फोर्स के प्रमुख डाॅ. वीके पाल ने कहा कि 10 फीसद से अधिक संक्रमण दर वाले जिलों की संख्या में बढ़ोतरी एक संयोग भी हो सकता है, लेकिन नए केस में लगातार गिरावट वाले जिलों में अचानक बढ़ोतरी चिंता का कारण है।