देश के 10 राज्यों का रेवेन्यू उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में 70 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है. अब इन 10 राज्यों का रेवेन्यू लगभग कोरोना काल से पहले के स्तर पर पहुंचने वाला है. वित्त वर्ष 2022 के दौरान में इसमें 600 बेसिस प्वॉइंट तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है. दरसअल, इन राज्यों के रेवेन्यू में यह बढ़ोतरी टैक्स दायरे में इजाफे की वजह से संभव होगा.
इन राज्यों को पेट्रोल-डीज़ल पर मिलने वाले सेल्स टैक्स के अलावा 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत मिलने वाले अनुदान में भी इजाफा हुआ है. ईंधन पर टैक्स से राज्यों को करीब 10 फीसदी रेवेन्यू प्राप्त होता है.
9.5 फीसदी तक पहुंच सकती है जीडीपी
एजेंसी ने महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और केरल की रेवेन्यू की एनलिसिस के आधार पर यह बात कही है. क्रिसिल रेटिंग्स का अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में भारतीय जीडीपी दर 9.5 फीसदी की दर पर रहने का हमारा अनुमान है. इससे जीएसटी कलेक्शन में महामारी से पहले के दौर से भी बेहतर सुधार होगा.
राज्यों को जीएसटी रेवेन्यू से भी फायदा हुआ
रेटिंग एजेंसी ने अपनी इस रिपोर्ट में आगे यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में राज्यों को वस्तु एवं सेवा कर (GST) से मिलने वाले कुल रेवेन्यू में भी इजाफा हुआ है. इन राज्यों में कुल रेवेन्यू का करीब पांचवां हिस्सा जीएसटी से ही आता है. पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां फिर से बढ़ी और परिणामस्वरूप जीएसटी कलेक्शन में इजाफा हुआ.
अगस्त में जीएसटी रेवेन्यू कोरोना काल से पहले के स्तर पर होगा
अप्रैल और मई में भी औसत जीएसटी कलेक्शन करीब 0.93 लाख करोड़ रुपये रहा है. पिछले साल की सामान अवधि की तुलना में यह करीब 11 फीसदी बढ़ा है. क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक मनीष गुप्ता ने कहा, ‘महामारी की दूसरी लहर की वजह से जून और जुलाई महीने के लिए जीएसटी कलेक्शन पर असर पड़ सकता है. लेकिन अगस्त तक हमें अनुमान है कि यह कोरोना काल से पहले के स्तर पर पहुंच जाएगा.
कैसे और कहां से होती है राज्यों की कमाई
राज्यों की कमाई का प्रमुख जरिया सेंट्रल टैक्स (25 फीसदी), स्टेट जीएसटी (21 फीसदी), केंद्र से मिलने वाला अनुदान (17 फीसदी), पेट्रोल-डीज़ल और शराब की बिक्री से मिलने वाला सेल्स टैक्स (13 फीसदी) होता है. नॉन-टैक्स रेवेन्यू में एक्साइज ड्यूटी, स्टैम्प ड्यूटी समेत अन्य तरह के रेवेन्यू होते हैं.
ध्यान देने योग्य है कि कई राज्यों में पेट्रोल का भाव 100 रुपये के पार जा चुका है और कुछ जगहों पर तो डीज़ल भी, लेकिन इसके बावजूद भी केंद्र और राज्य सरकारों ने टैक्स में कोई कटौती नहीं की है.
पेट्रोल-डीज़ल की बिक्री से खूब भर रही झोली
राज्यों के रेवेन्यू में बढ़ोतरी के पीछे सेल्स टैक्स से होने वाली कमाई है. वित्त वर्ष 2020 में कच्चे तेल का औसत भाव 60 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. इससे पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में इजाफा हुआ है. पिछले साल एक्साइज ड्यूटी के तौर पर 10 से 13 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है.
इससे राज्यों को ईंधन की बिक्री पर मिलने वाला सेल्स टैक्स बढ़ गया है, जोकि करीब 10 फीसदी है. इन 10 राज्यों में से अधिकतर ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान ईंधन पर सेल्स टैक्स में 6-7 फीसदी यानी 1.5-1.8 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया है.