Ghaziabad : SSP की गिरी गाज,एसएचओ इंदिरापुरम निलंबित और साहिबाबाद से मांगा स्पष्टीकरण! ज़ाने.. क्या है मामला?

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गाजियाबाद :- कहा जाता है हॉटसिटी गाजियाबाद में थानेदारी हासिल करने के लिए ना सिर्फ साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनानी पड़ती है बल्कि लखनऊ के सत्ता के गलियारों में भी बेहद मज़बूत पकड़ लाजमी है। जिसके बल पर ही नोएडा और गाजियाबाद में थानेदारी मिल सकती है। विशेष रुप से हिंडन पार के थानों में तैनाती के लिए कहा जाता है कि योग्यता के साथ लखनऊ से लेकर गाजियाबाद तक ब्यूरोक्रेसी एवं राजनीतिक रूप से इंस्पेक्टर साहब को बेहद मजबूत होना आवश्यक है।

लेकिन जब कोई मामला बेहद बड़ा हो जाता है तब ऊंची पकड़ और सत्ता का लाभ भी हर किसी को नहीं मिल पाता है। इसका उदाहरण उस समय देखने को मिला जब औरैया में हुए सड़क हादसे की गाज इंदिरापुरम एसएचओ पर गिरी। लेकिन इस मामले में साहिबाबाद एसएचओ को अभयदान मिल गया। हालांकि उन्हें स्पष्टीकरण पुलिस कप्तान कलानिधि नैथानी को देना है लेकिन लाइन हाजिर या निलंबन जैसी स्थिति से उन्हें दो-चार नहीं होना पड़ा।

हालांकि देखा जाए तो साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया सहित थाना क्षेत्र के कई इंडस्ट्रियल एरिया से हजारों मजदूर पैदल ही गाजियाबाद को क्रॉस कर निकल गए हैं लेकिन सारी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद भी साहिबाबाद एसएचओ से मात्र स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

गौरतलब है कि जहां थाना इंदिरापुरम के एसएचओ अमित खारी को पुलिस कप्तान ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वही इस मामले में साहिबाबाद एसएचओ से स्पष्टीकरण मांगा है। बताया जाता है कि एसएचओ साहिबाबाद अनिल शाही जहां एक बेहद कर्मठ और काबिल पुलिस अफसर हैं। वही सत्ता में उनकी पकड़ भी बेहद मजबूत है।

यह बात भी काबिले गौर है कि बेहतर वर्किंग वाले अधिकारियों को पूरे प्रदेश में ही जाना पहचाना जाता है। जिसके चलते ब्यूरोक्रेसी से लेकर सत्ता के गलियारों तक उनके काम की गूंज सुनाई देती है। मजबूत इच्छा शक्ति और कार्य कुशल अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी मिलती हैं और उनके कार्य कुशलता का लाभ भी ब्यूरोक्रेसी एवं सत्ता पक्ष को मिलता है।

ऐसे में अब देखना होगा कि पुलिस कप्तान कलानिधि नैथानी के स्पष्टीकरण के एवज एसएचओ साहिबाबाद अनिल शाही कब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं और उस रिपोर्ट से पुलिस कप्तान के साथ तक संतुष्ट होते हैं।